पटना। बिहार की राजधानी पटना में 25 अगस्त 2026 को छात्र आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए। छात्रों को रोकने के लिए डाकबंगला चौराहे से लेकर जेपी गोलंबर तक भारी पुलिस…
पटना। बिहार की राजधानी पटना में 25 अगस्त 2026 को छात्र आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए। छात्रों को रोकने के लिए डाकबंगला चौराहे से लेकर जेपी गोलंबर तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया और बड़े-बड़े लोहे के बैरिकेड लगाए गए। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) इस आंदोलन का समाधान कैसे निकालते हैं।
दरअसल, यह आंदोलन शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 के परीक्षा पैटर्न और अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा है। पिछले कई दिनों से पटना के गर्दनीबाग में छात्र धरना दे रहे थे, लेकिन 24 अगस्त को BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस में परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी ने विवाद को और भड़का दिया।
उनके ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ वाले बयान को छात्रों ने अपने अपमान के तौर पर लिया। इसके बाद आंदोलन और उग्र हो गया और छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान कर दिया।
आखिर TRE-4 को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र?
छात्रों की नाराजगी का मुख्य केंद्र बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा के तरीके और स्थानीय अभ्यर्थियों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार से बदलाव की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में एकल चरण में परीक्षा, नेगेटिव मार्किंग खत्म करना और बिहार के मूल निवासियों के लिए 100 प्रतिशत डोमिसाइल आधारित स्थानीयता नीति शामिल है।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा को दो चरणों में कराने से अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। वहीं नेगेटिव मार्किंग को लेकर उनका तर्क है कि इसे हटाया जाना चाहिए। स्थानीयता को लेकर प्रदर्शनकारी बिहार के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
इन मांगों को लेकर छात्रों का धरना 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग में चल रहा था। आंदोलन में ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के अमन गुट की भूमिका भी बताई जा रही है।
कैसे शुरू हुआ ‘हाथी-कुत्ते’ वाला विवाद?
विवाद की शुरुआत 24 अगस्त को BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने TRE-4 की परीक्षा दिसंबर या जनवरी में दो चरणों में कराए जाने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था रहेगी।
जब पत्रकारों ने उनसे गर्दनीबाग में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि ‘हाथी चले बाजार तो कुत्ते भौंके हजार।’
यही टिप्पणी छात्रों के गुस्से की बड़ी वजह बन गई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे अपने अपमान से जोड़ते हुए BPSC के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि परीक्षा को लेकर सवाल उठाने वाले अभ्यर्थियों की तुलना इस तरह करना उचित नहीं है।
इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी यह बयान चर्चा का विषय बन गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारी को किया सस्पेंड
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह को निलंबित करने का आदेश दिया। अधिकारी की ओर से बाद में वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी के लिए माफी भी मांगी गई।
हालांकि, छात्रों का आंदोलन इससे खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि उनकी लड़ाई केवल अधिकारी के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि TRE-4 की परीक्षा से जुड़ी मूल मांगों को लेकर भी है।
यानी अधिकारी के निलंबन और माफी के बावजूद छात्र अपने परीक्षा संबंधी मुद्दों पर सरकार से ठोस निर्णय की मांग करते रहे।
शिक्षा विभाग ने भी भेजा प्रस्ताव
विवाद के बीच शिक्षा विभाग की ओर से भी पहल की गई। विभाग ने BPSC को TRE-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में बदलाव का प्रस्ताव भेजा है।
प्रस्ताव के अनुसार, परीक्षा में 50 प्रतिशत प्रश्न बाल मनोविज्ञान से और बाकी 50 प्रतिशत प्रश्न सामान्य ज्ञान यानी GK/GS से पूछे जाने का सुझाव दिया गया है। GK/GS वाले हिस्से में बिहार के इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था और भूगोल से जुड़े प्रश्नों को भी शामिल करने की बात कही गई है।
इसके अलावा ‘वन कैंडिडेट-वन रिजल्ट’ की मांग भी BPSC के सामने रखी गई है। हालांकि इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला बिहार लोक सेवा आयोग को करना है।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
छात्र आंदोलन को लेकर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दावा किया कि छात्रों की ज्यादातर मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा।
मंत्री ने तेजस्वी यादव की शैक्षणिक योग्यता को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति 10वीं की बोर्ड परीक्षा तक नहीं दे पाया, वह परीक्षा को लेकर सुझाव दे रहा है। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
पटना में प्रशासन ने कड़ी की सुरक्षा
छात्रों के मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च को देखते हुए पटना पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। डाकबंगला चौराहे पर बड़े लोहे के बैरिकेड लगाए गए, ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
डाकबंगला और जेपी गोलंबर समेत प्रमुख स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय बलों के जवानों की भी तैनाती की गई।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थान से आगे न बढ़ें और मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले रास्तों को सुरक्षित रखा जाए।
छात्र नेताओं का क्या कहना है?
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका दावा है कि संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और वे हर हाल में मुख्यमंत्री से अपनी बात रखने की कोशिश करेंगे।
छात्र नेताओं का कहना है कि वे पहले भी पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं और इस बार भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका जोर इस बात पर है कि सरकार केवल बयान या आश्वासन देने के बजाय परीक्षा से जुड़ी मांगों पर स्पष्ट निर्णय करे।
हालांकि, सभी छात्र संगठन इस आंदोलन में शामिल नहीं हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार और AISA जैसे संगठनों ने खुद को इस मार्च से अलग रखा है।
तेजस्वी यादव ने छात्रों का किया समर्थन
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों को समर्थन दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर तत्काल विचार करने की अपील की।
तेजस्वी यादव ने कहा कि आंदोलन कर रहे युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात भी की और विपक्ष एवं महागठबंधन के समर्थन का भरोसा दिया।
इससे TRE-4 का छात्र आंदोलन अब परीक्षा से जुड़े मुद्दे के साथ-साथ बिहार की राजनीति का भी बड़ा विषय बन गया है।
बयान से शुरू हुआ विवाद अब परीक्षा सुधार की लड़ाई
पूरे घटनाक्रम को देखें तो छात्र आंदोलन की मूल वजह TRE-4 की परीक्षा से जुड़ी मांगें हैं। लेकिन BPSC अधिकारी के ‘हाथी-कुत्ते’ वाले बयान ने आंदोलन को नया राजनीतिक और भावनात्मक मुद्दा दे दिया।
अधिकारी के निलंबन और माफी के बाद भी छात्र पीछे नहीं हटे, क्योंकि उनका कहना है कि केवल बयान पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। वे परीक्षा के चरण, नेगेटिव मार्किंग और स्थानीयता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
अब सरकार और BPSC के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन को शांत करने के साथ-साथ छात्रों की मांगों पर ऐसा समाधान निकालने की है, जिसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके।
फिलहाल पटना में छात्र आंदोलन जारी है और मुख्यमंत्री आवास के घेराव को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। आने वाले समय में सरकार और BPSC की ओर से लिए जाने वाले फैसले यह तय करेंगे कि यह आंदोलन शांत होता है या बिहार में छात्र राजनीति का एक और बड़ा अध्याय बनता है।