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बीजेपी नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह हत्याकांड में नया खुलासा, प्लॉट-रुपयों के लालच में रची गई साजिश?

लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम बातें सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में हत्या के पीछे जमीन विवाद और आर्थिक लालच का एंगल सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, उनके करीब…

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V K Singh

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बीजेपी नेता धीरेन्द्र प्रताप सिंह हत्याकांड में नया खुलासा, प्लॉट-रुपयों के लालच में रची गई साजिश?

लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम बातें सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में हत्या के पीछे जमीन विवाद और आर्थिक लालच का एंगल सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, उनके करीब 10 साल पुराने ड्राइवर पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है और उसे कथित तौर पर बड़ी रकम तथा संपत्ति का लालच दिया गया था।

ड्राइवर पर लगा भरोसे का फायदा उठाने का आरोप

पुलिस जांच के मुताबिक, धीरेन्द्र प्रताप सिंह का ड्राइवर लंबे समय से उनके साथ काम कर रहा था। इसी वजह से वह परिवार और उनकी दिनचर्या से अच्छी तरह परिचित था। पुलिस का आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसे कथित साजिश में शामिल किया गया।

पूछताछ में ‘लाइफ सेटल’ करने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे दो जगह आलीशान घर और मोटी रकम मिलने का सपना दिखाया गया था। हालांकि, पुलिस अभी कथित सुपारी की वास्तविक रकम और साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जमीन विवाद से जुड़ रहा हत्या का मामला

जांच में हत्या का कनेक्शन उन्नाव के एक जमीन विवाद से भी जोड़ा जा रहा है। धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर बांगरमऊ तहसील क्षेत्र में तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत की थी।

उन्होंने संबंधित जमीन की जांच और उसे कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। शिकायत में तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई थी।

प्लॉट और पैसों का लालच आया सामने

पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, साजिश में शामिल लोगों ने ड्राइवर को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लालच दिया था। रिपोर्ट्स में दो स्थानों पर मकान और मोटी रकम देने का वादा किए जाने की बात कही गई है।

यही वजह है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किसने ड्राइवर से संपर्क किया, उसे क्या लालच दिया गया और जमीन विवाद में किन लोगों के हित जुड़े हुए थे।

मोबाइल से पुलिस को गुमराह करने की कोशिश का आरोप

जांच में पुलिस को यह भी पता चला है कि मृतक के मोबाइल फोन को लेकर पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एक मोबाइल फोन को ट्रेन में रख दिया गया था, जिससे उसकी लोकेशन अलग-अलग जगहों पर दिखाई देती रही।

पुलिस ने जब मोबाइल की लोकेशन को ट्रैक किया तो कई अलग-अलग इलाकों की जानकारी सामने आई। अब जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि पुलिस को गुमराह करने की योजना किसने बनाई थी।

गनरों की भूमिका भी जांच के दायरे में

धीरेन्द्र प्रताप सिंह को दो गनर उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव हुआ था। एक गनर के बीमार होने और दूसरे को ड्यूटी पर नहीं आने देने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।

एसटीएफ भी जांच में शामिल

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में एसटीएफ की टीम भी शामिल हुई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साजिश की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है।

जांच का मुख्य फोकस जमीन विवाद, कथित आर्थिक लालच, ड्राइवर की भूमिका और उन लोगों की पहचान पर है जिन्होंने कथित तौर पर हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए संपर्क किया था।

पहले शिकायत, फिर हत्या ने बढ़ाए सवाल

इस मामले में सबसे अहम कड़ी धीरेन्द्र प्रताप सिंह की पुरानी जमीन संबंधी शिकायत को माना जा रहा है। उन्होंने सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और रजिस्ट्री से जुड़े मामलों की जांच की मांग की थी।

अब हत्या की जांच में उसी जमीन विवाद का एंगल सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उनकी शिकायत और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध था।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। अभी जमीन विवाद और आर्थिक लालच को जांच का प्रमुख एंगल माना जा रहा है; अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा

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