लखनऊ। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े विवाद में निर्वाचन आयोग के अंतरिम फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। अखिलेश यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले ऐसे होने चाहिए, जिनसे लोकतांत्रिक मूल्यों को…
लखनऊ। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े विवाद में निर्वाचन आयोग के अंतरिम फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। अखिलेश यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले ऐसे होने चाहिए, जिनसे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिले। उन्होंने कहा कि अगर आयोग ऐसे फैसले करता है, तो उसकी प्रतिष्ठा और गरिमा में वृद्धि होगी।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह टिप्पणी करते हुए अपनी पार्टी की ओर से निर्वाचन आयोग को सौंपे गए हलफनामों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या आयोग को समाजवादी पार्टी की ओर से दिए गए हलफनामे प्राप्त हुए थे। सपा ने इन हलफनामों में मतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है।
TMC को लेकर EC का क्या फैसला?
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े आंतरिक विवाद के बीच एक अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग के अनुसार पार्टी में दो विरोधी गुट सामने आए हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हैं।
आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों से अपनी पसंद के तीन पार्टी नाम और तीन चुनाव चिह्न देने को कहा गया है।
अखिलेश ने क्यों उठाया लोकतांत्रिक मूल्यों का मुद्दा?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में सीधे तौर पर किसी एक गुट का समर्थन करने के बजाय निर्वाचन आयोग के फैसलों के व्यापक सिद्धांत पर बात की। उनका कहना था कि आयोग की कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और गरिमा मजबूत हो।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब समाजवादी पार्टी खुद चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों को लेकर निर्वाचन आयोग के सामने दस्तावेज और हलफनामे पेश कर चुकी है। इसी संदर्भ में अखिलेश ने पूछा कि क्या आयोग ने उनकी पार्टी की ओर से दिए गए हलफनामों को संज्ञान में लिया है।
TMC के दोनों गुटों को देना होगा नया नाम और निशान
निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के मुताबिक, विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों गुट TMC के मौजूदा नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन नाम और तीन उपलब्ध चुनाव चिह्न देने को कहा था।
आयोग ने यह कार्रवाई Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के प्रावधानों के तहत की है। आयोग के सामने अब यह सवाल है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करने वाले दोनों पक्षों में से किसके दावे को स्वीकार किया जाए। इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी अलग प्रक्रिया के तहत होना है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी चर्चा
TMC के नाम और ‘जोड़ा फूल’ निशान को लेकर निर्वाचन आयोग का अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं, अखिलेश यादव की टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को विपक्षी दलों और निर्वाचन आयोग के बीच चल रही व्यापक बहस से भी जोड़ दिया है।
फिलहाल अखिलेश यादव का स्पष्ट संदेश यही है कि निर्वाचन आयोग के फैसलों से लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रतिष्ठा और संस्थागत गरिमा को मजबूती मिलनी चाहिए। TMC के दोनों गुटों से जुड़े विवाद पर आयोग का अंतिम निर्णय आगे की राजनीतिक और चुनावी स्थिति को प्रभावित करेगा।