*राहुल गांधी पर लगे केस में परिवादी पक्ष लगातार मांग रहा अवसर*

*एमपी-एमएलए कोर्ट ने बहस के लिए तय की 21 तारीख*

*भाजपा नेता की याचिका हाईकोर्ट से हो चुकी है खारिज,आदेश के प्रति पेश*
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सुल्तानपुर। गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में बुधवार को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में फाइनल बहस के लिए तारीख नियत रही। मामले में परिवादी भाजपा नेता की तरफ से हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के आदेश की कम्प्यूटर प्रति पेश की गई और उनके अधिवक्ता के यहां धार्मिक कार्यक्रम होने की वजह से बहस तैयार नहीं हो पाने का तर्क रखते हुए अवसर देने की मांग की गई। वहीं राहुल गांधी के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। स्पेशल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने मामले में नियत तिथि पर बहस करने का भरोसा दिलाने पर अवसर देते हुए 21 सितंबर की तारीख तय किया है।
कोतवाली देहात थाने के हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्र ने साल 2018 में राहुल गांधी के जरिये गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से नाराज होकर मानहानि का मुकदमा पेश किया है। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में लम्बित चल रही है। साक्ष्य की कार्यवाही खत्म होने के बाद अदालत ने मामले में फाइनल बहस के लिए कार्यवाही नियत किया था। गत 12 मार्च को परिवादी विजय मिश्र की तरफ से राहुल गांधी के आवाज की जांच व मिलान विधि विज्ञान प्रयोगशाला से कराने के लिए ट्रायल कोर्ट में अर्जी दी गई थी,जिसे अदालत ने गत दो मई को खारिज कर दिया था। परिवादी भाजपा नेता की तरफ से मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका पेश कर चुनौती दी गई थी,फिलहाल उनकी निगरानी याचिका भी गत 15 जुलाई को एमपी-एमएलए कोर्ट के सेशन जज राकेश यादव ने निराधार पाते हुए खारिज कर दिया था। सेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका पेश की गई थी। राहुल गांधी के अधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट में परिवादी विजय मिश्रा की तरफ से केस से जुड़े सभी अभिलेखों को नहीं पेश किया था,बल्कि अपने खिलाफ के अभिलेख जानबूझकर कोर्ट में नहीं रखे गए थे। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई के पश्चात शुरुआती स्तर पर ही याचिका बलहीन पाते हुए गत 10 सितंबर को खारिज कर दिया था। फिलहाल याचिका लम्बित रहने एवं खारिज होने के बाद भी परिवादी पक्ष के जरिए लगातार बहस के लिए अवसर मांगा जा रहा है,नतीजतन बहस की कार्यवाही लम्बे समय से बाधित चल रही है। परिवादी की याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने पर ट्रायल कोर्ट में होने वाली बहस का रास्ता साफ हो गया है।