केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की है। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को लेकर कहा, “पागल आदमी है, इसको अमेरिका का भूत है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब UPI…
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की है। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को लेकर कहा, “पागल आदमी है, इसको अमेरिका का भूत है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR चार्ज लगाए जाने की चर्चा के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई है।
गिरिराज सिंह ने इसी दौरान समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा। अखिलेश यादव की ओर से UCC को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने पूछा कि इसमें कम्युनल कॉन्सपिरेसी कैसे हो गई। उन्होंने UCC के मुद्दे को देश में समान कानून से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
UCC पर अखिलेश यादव के बयान का जवाब
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले बीजेपी और NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से पहले पुराने वादे पूरे करने की बात कही थी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया था।
गिरिराज सिंह ने UCC को लेकर अखिलेश यादव की आपत्ति पर पलटवार किया और कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर इस तरह के सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में देश के विभाजन और आजादी के बाद व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े इतिहास का भी जिक्र किया।
शरिया और तुष्टिकरण को लेकर कांग्रेस पर निशाना
गिरिराज सिंह ने अपने बयान में कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के दौर में तुष्टिकरण की वजह से मुस्लिम समुदाय को शरिया कानून के तहत व्यक्तिगत मामलों में अलग व्यवस्था मिली और मस्जिदों को अलग स्टेटस दिया गया।
हालांकि, उनके इन ऐतिहासिक और राजनीतिक दावों को उनके बयान के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। UCC को लेकर देश में लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण रहे हैं और इसके प्रावधानों को लेकर भी विभिन्न दलों की अपनी-अपनी राय है।
JDU के रुख पर बोले- ‘जबरदस्ती कुछ नहीं होगा’
UCC को लेकर NDA के सहयोगी दल JDU के रुख पर भी गिरिराज सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में जबरदस्ती कुछ नहीं किया जाएगा और बातचीत के जरिए आगे बढ़ा जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब JDU ने UCC पर अंतिम फैसला लेने से पहले प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को देखने की बात कही है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने 15 सितंबर को कहा था कि बिल के प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं और उन्हें देखने के बाद पार्टी इस मुद्दे पर विमर्श करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रावधान स्वीकार्य हुए तो JDU बिना वजह इसका विरोध नहीं करेगी।
JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा की ओर से भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर बातचीत की बात सामने आई है। पार्टी की ओर से व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत पर जोर दिया गया है।
ओवैसी के बयान पर भी गिरिराज सिंह का पलटवार
AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के UCC से जुड़े बयान पर भी गिरिराज सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हत्या, चोरी या दूसरे आपराधिक मामलों में अलग-अलग धार्मिक कानून लागू नहीं होते, तो व्यक्तिगत कानूनों के दूसरे मामलों में अलग व्यवस्था की मांग क्यों की जाती है।
गिरिराज सिंह ने इस दौरान शाहबानो मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर मुस्लिम धार्मिक नेताओं के दबाव में आने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सरकार ऐसा नहीं करेगी। उन्होंने अपने बयान में ‘एक देश, एक कानून’ की बात दोहराई।
UCC पर बढ़ी राजनीतिक बहस
UCC को लेकर फिलहाल राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। एक तरफ केंद्र सरकार की ओर से NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर बयान सामने आया है, वहीं दूसरी तरफ सहयोगी दलों में इसके स्वरूप और प्रावधानों को लेकर चर्चा जारी है।
JDU ने अभी अंतिम फैसला लेने से पहले ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों का अध्ययन करने की बात कही है। पार्टी नेताओं के अनुसार, आगे की रणनीति व्यापक चर्चा और गठबंधन सहयोगियों के साथ बातचीत के बाद तय की जाएगी।
ऐसे में गिरिराज सिंह के ताजा बयान ने UCC को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। राहुल गांधी पर उनकी टिप्पणी और अखिलेश यादव तथा ओवैसी के बयानों पर उनका पलटवार आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बने रहने की संभावना रखता है।