शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

800 किलोमीटर लंबा VCIC कॉरिडोर बदलेगा औद्योगिक तस्वीर, निवेश और रोजगार को मिल सकती है रफ्तार

भारत के पूर्वी तट पर 800 किलोमीटर लंबा विशाखापत्तनम–चेन्नई औद्योगिक कॉरिडोर (VCIC) आंध्र प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। यह कॉरिडोर बंदरगाहों, परिवहन नेटवर्क और औद्योगिक क्लस्टरों को जोड़कर विनिर्माण, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देगा।

P
Pawan Kumar

3 मिनट विशाखापट्टनम

शेयर करें:
800 किलोमीटर लंबा VCIC कॉरिडोर बदलेगा औद्योगिक तस्वीर, निवेश और रोजगार को मिल सकती है रफ्तार
भारत के पूर्वी तट पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए विशाखापट्टनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (VCIC) परियोजना पर जोर दिया जा रहा है।

भारत के पूर्वी तट पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए विशाखापट्टनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (VCIC) परियोजना पर जोर दिया जा रहा है। 800 किलोमीटर से अधिक लंबा यह औद्योगिक गलियारा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के औद्योगिक क्षेत्रों को बंदरगाहों और प्रमुख परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य माल ढुलाई का समय और लागत कम करना, उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं तैयार करना और नए निवेश को आकर्षित करना है।

क्या है VCIC और क्यों है अहम?

VCIC, ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर (ECEC) का पहला चरण है। इस परियोजना को एशियाई विकास बैंक (ADB) की वित्तीय और तकनीकी सहायता मिल रही है। इसके नेटवर्क को राष्ट्रीय राजमार्ग-16 और कोलकाता-चेन्नई रेल लाइन जैसी प्रमुख परिवहन सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। विशाखापट्टनम, गंगावरम, काकीनाडा और कृष्णापट्टनम जैसे बंदरगाहों से बेहतर संपर्क होने पर कंपनियों के लिए कच्चा माल मंगाना और तैयार उत्पादों का निर्यात करना आसान हो सकता है।

पांच औद्योगिक नोड्स पर रहेगा फोकस

कॉरिडोर के तहत विशाखापट्टनम, श्रीकालहस्ती-येरपेडु, कोप्पर्थी, मछिलीपट्टनम और दोनाकोंडा जैसे औद्योगिक नोड्स के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें कोप्पर्थी औद्योगिक क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कडपा जिले में प्रस्तावित यह क्षेत्र करीब 2,596 एकड़ में फैला है। यहां नवीकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए अवसर तैयार करने की योजना है।

कोप्पर्थी को कडपा बायपास से जोड़ने के लिए 5.8 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे को करीब 304 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने की जानकारी भी सामने आई है। बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक वाहनों की आवाजाही आसान हो सकती है और आसपास के क्षेत्रों में कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

निवेश के साथ रोजगार की उम्मीद

VCIC का फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने पर इंजीनियरों, मशीन ऑपरेटरों, तकनीकी कर्मचारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर बन सकते हैं। गोदाम, लॉजिस्टिक्स, मरम्मत सेवाओं, होटल और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों के साथ रायलसीमा जैसे अंदरूनी इलाकों को भी बेहतर संपर्क और नए निवेश से फायदा मिल सकता है। हालांकि, रोजगार और निवेश का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि औद्योगिक नोड्स कितनी जल्दी विकसित होते हैं और कितनी कंपनियां वहां अपनी इकाइयां स्थापित करती हैं।

समयसीमा और क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती

परियोजना को सफल बनाने के लिए जमीन की उपलब्धता, पर्यावरण संबंधी मंजूरियां, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होगा। निवेश की घोषणा मात्र से सभी औद्योगिक इकाइयों का जल्द शुरू होना सुनिश्चित नहीं होता। परियोजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब बुनियादी ढांचा समय पर तैयार हो और कंपनियां वहां उत्पादन शुरू करें।

कुल मिलाकर, VCIC पूर्वी तट पर बंदरगाह आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। बेहतर परिवहन संपर्क से माल ढुलाई की लागत घटाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसकी सफलता परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन और उद्योगों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगी।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →