अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) अपने पहले सीजन से पहले ही विवादों में घिर गई है। इंग्लैंड के तीन क्रिकेटरों—ओली पोप, डेविड विली और विल स्मीड ने टूर्नामेंट के ड्राफ्ट से अपने नाम वापस ले लिए हैं।
अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। तालिबान शासन के दौरान महिलाओं के अधिकारों और खेलों में उनकी भागीदारी पर लगी पाबंदियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंग्लैंड के तीन क्रिकेटरों ने टूर्नामेंट के ड्राफ्ट से अपने नाम वापस ले लिए हैं। इनमें इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेटर ओली पोप, तेज गेंदबाज डेविड विली और बल्लेबाज विल स्मीड शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के फैसले से अफगानिस्तान की प्रस्तावित टी20 लीग में इंग्लैंड के क्रिकेटरों की भागीदारी को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) के भीतर भी अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति देने को लेकर चर्चा जारी है। खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर नैतिक चिंताओं के साथ-साथ कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है।
ओली पोप ने क्यों वापस लिया नाम?
इंग्लैंड के टेस्ट स्टार ओली पोप हाल ही में टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। उन्होंने बोर्ड के साथ एक साल का नया सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी किया है। जब उनका नाम अफगानिस्तान प्रीमियर लीग के ड्राफ्ट में शामिल होने की खबर सामने आई, तो उनकी संभावित भागीदारी पर सवाल उठने लगे। इसके बाद उन्होंने ड्राफ्ट से अपना नाम वापस लेने का फैसला किया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, डेविड विली और विल स्मीड ने भी टूर्नामेंट से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। इन फैसलों ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों के सामने मौजूद नैतिक सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, खिलाड़ियों के नाम वापस लेने के पीछे उनके अपने व्यक्तिगत कारणों और फैसलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
तालिबान शासन और महिला खिलाड़ियों के अधिकारों का मुद्दा
अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। साल 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद महिलाओं की शिक्षा, सार्वजनिक जीवन और खेलों में भागीदारी पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। इसी वजह से अफगानिस्तान के खेल प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत के सामने भी सवाल खड़े होते रहे हैं।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने अफगानिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेलने का रुख अपनाया है। हालांकि, दोनों देशों की टीमें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं। अब अफगानिस्तान की घरेलू टी20 लीग में इंग्लैंड के खिलाड़ियों की संभावित भागीदारी ने बोर्ड के सामने एक अलग तरह की चुनौती खड़ी कर दी है।
ECB के सामने नैतिकता और कानून की चुनौती
ESPNcricinfo की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में इंग्लैंड के खिलाड़ियों के खेलने को लेकर ECB के सामने नैतिक और कानूनी, दोनों तरह के सवाल हैं। बोर्ड के अध्यक्ष रिचर्ड थॉम्पसन ने पिछले सप्ताह कहा था कि लीग में खेलने के लिए खिलाड़ियों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने के मामले पर गंभीरता से विचार करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में रोजगार और व्यापार से जुड़े कानूनी प्रावधानों के कारण खिलाड़ियों को किसी प्रतियोगिता में भाग लेने से रोकने का मामला जटिल हो सकता है। ऐसे में बोर्ड को यह देखना होगा कि वह नैतिक चिंताओं और कानूनी सीमाओं के बीच किस तरह संतुलन बनाए।
ECB के पुरुष क्रिकेट निदेशक रॉब की ने भी खिलाड़ियों से इस मुद्दे पर नैतिक पहलू को ध्यान में रखकर फैसला लेने की अपील की थी। उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ हो रहे व्यवहार पर असहमति जताई और कहा कि व्यक्तिगत रूप से वह इस लीग में खेलने नहीं जाते। उनके रुख से साफ है कि यह मामला केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और मानवीय अधिकारों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
APL के आयोजन पर भी मंडराए सवाल
अफगानिस्तान प्रीमियर लीग के आयोजन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, लीग की पांच प्रस्तावित फ्रेंचाइजी में से अब तक केवल तीन ही बिक पाई हैं। इससे टूर्नामेंट की व्यावसायिक तैयारियों और भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लीग का आयोजन 27 दिसंबर से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में प्रस्तावित बताया गया है। ऐसे में फ्रेंचाइजी की बिक्री, खिलाड़ियों की उपलब्धता और ECB की ओर से NOC देने से जुड़े सवाल टूर्नामेंट की तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, आयोजन रद्द होने या कार्यक्रम में बदलाव को लेकर अभी किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।
अब आगे क्या होगा?
ओली पोप, डेविड विली और विल स्मीड के नाम वापस लेने के बाद अब सबकी नजर ECB के अगले कदम पर है। बोर्ड को यह तय करना होगा कि अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ियों के NOC अनुरोधों पर क्या रुख अपनाया जाए। वहीं, लीग आयोजकों के सामने खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और फ्रेंचाइजी से जुड़े सवालों का समाधान करने की चुनौती है।
फिलहाल APL का भविष्य कई सवालों के बीच है। यह देखना अहम होगा कि क्या टूर्नामेंट प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो पाता है और इंग्लैंड के अन्य खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेने का फैसला करते हैं या नहीं।