भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink की एंट्री को लेकर विवाद तेज हो गया है। मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े कारोबारी समूह अपने एकाधिकार को बचाने के लिए Starlink की लॉन्चिंग में बाधा डाल रहे हैं और मुकेश अंबानी की भूमिका पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली। भारत में सस्ते इंटरनेट और 6G तकनीक को लेकर चर्चा के बीच सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink की एंट्री का मुद्दा भी गरमा गया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने India Mobile Congress (IMC) 2026 के दौरान भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी में हुई प्रगति का जिक्र किया। वहीं, एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत में Starlink को लेकर सवाल उठाए। इस मुद्दे पर राहुल गांधी और मस्क के बीच भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई।
भारत में इंटरनेट की कीमत और इस्तेमाल पर क्या बोले सिंधिया?
IMC 2026 के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में इंटरनेट डेटा की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर की संख्या पहले लगभग 6 करोड़ थी, जो बढ़कर करीब 100 करोड़ तक पहुंच गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में 5G सेवाओं को तेजी से अपनाया गया है और 5G यूजर्स की संख्या लगभग 55 करोड़ हो गई है। सरकार का लक्ष्य देश में डिजिटल कनेक्टिविटी का दायरा और बढ़ाना है। सिंधिया ने यह भी विश्वास जताया कि भारत 6G तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा।
एलन मस्क ने भारत में Starlink को लेकर उठाए सवाल
एलन मस्क ने एक्स पर दावा किया कि भारत में कुछ उद्योगपति Starlink की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं, ताकि बाजार में उनका एकाधिकार बना रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब Starlink को कई देशों में सेवा देने की अनुमति मिल चुकी है, तो भारत में लाइसेंस प्रक्रिया में इतना समय क्यों लग रहा है।
मस्क ने यह भी कहा कि उनकी कंपनी ने भारत सरकार के नियमों और आवश्यकताओं को पूरा करने में वर्षों लगाए हैं। अपने पोस्ट में उन्होंने उद्योगपति मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या अंबानी भारत में सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाले व्यक्ति हैं। ये मस्क के आरोप और सवाल हैं; इनके समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध नहीं है।
सिंधिया बोले—तीन कंपनियों के पास लाइसेंस
Starlink को लेकर उठे सवालों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। उन्होंने जोर दिया कि किसी एक कंपनी को विशेष लाभ देने के बजाय सभी लाइसेंसधारियों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा।
सिंधिया के मुताबिक, सरकार राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था तय करेगी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया उसके अनुसार आगे बढ़ेगी। सभी कंपनियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके बाद वे अपनी सेवाएं शुरू कर सकेंगी।
राहुल गांधी और सिंधिया के बीच भी राजनीतिक बयानबाजी
Starlink के मुद्दे पर राहुल गांधी और एलन मस्क की सोशल मीडिया पर हुई बातचीत के बीच सिंधिया ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले किसी खास व्यक्ति को लाइसेंस दिए जाने पर सवाल उठाती थी और अब उसी व्यक्ति को लाइसेंस नहीं मिलने पर आपत्ति जता रही है।
सिंधिया ने कांग्रेस के रुख को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है और लाइसेंस, स्पेक्ट्रम आवंटन तथा सुरक्षा संबंधी शर्तें तय प्रक्रिया के तहत पूरी की जाएंगी।
क्या भारत में जल्द शुरू होगी Starlink की सेवा?
Starlink की भारत में शुरुआत लाइसेंस और नियामकीय मंजूरियों के साथ-साथ सुरक्षा शर्तों के अनुपालन पर निर्भर करेगी। सिंधिया के बयान के अनुसार, लाइसेंस मिलना सेवा शुरू करने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है; संबंधित शर्तें पूरी होने के बाद ही कंपनियां परिचालन शुरू कर सकेंगी।
ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि Starlink आवश्यक औपचारिकताएं कब तक पूरी करती है और भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर आगे क्या फैसला होता है।