बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

लखनऊ में 68 मध्यस्थ अधिवक्ताओं के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

लखनऊ के गोमती नगर स्थित जेटीआरआई में 68 मध्यस्थ अधिवक्ताओं के लिए 40 घंटे का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम ‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लंबित विवादों को आपसी सहमति से सुलझाना और अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करना है।

Pawan Kumar
Pawan Kumar

2 मिनट लखनऊ

शेयर करें:
लखनऊ में 68 मध्यस्थ अधिवक्ताओं के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के पाठ्यक्रम के तहत 17 अक्टूबर तक चलेगा प्रशिक्षण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जिला न्यायालयों में कार्यरत 68 मध्यस्थ अधिवक्ताओं के लिए 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 13 से 17 अक्टूबर 2026 तक गोमती नगर स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में संचालित हो रहा है। इसका उद्देश्य अधिवक्ताओं को मध्यस्थता के सिद्धांतों और व्यावहारिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देकर विवादों के प्रभावी एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए तैयार करना है।

 न्यायिक अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजन

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के संरक्षण तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के निर्देशन में कार्यक्रम संचालित हो रहा है।

प्रशिक्षण सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) द्वारा तैयार व्यवस्थित पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

 विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर

13 अक्टूबर को आयोजित उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की सदस्य सचिव डॉ. (श्रीमती) मनु कालिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान को आसान बनाने और लोगों की न्याय तक पहुंच मजबूत करने में मध्यस्थता की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में बताया गया कि मध्यस्थता केवल विवाद निपटाने का विकल्प नहीं, बल्कि आपसी संबंधों को पुनर्स्थापित करने, विश्वास विकसित करने और सम्मानजनक तरीके से न्याय तक पहुंचने का माध्यम भी है। सफल मध्यस्थता से विवादों का अंतिम समाधान संभव हो सकता है और भविष्य में उसी मुद्दे को लेकर शिकायत या मुकदमेबाजी की आशंका कम की जा सकती है।

 संवाद और बातचीत के व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ताओं को संवाद कौशल, बातचीत की तकनीक, विवाद के प्रमुख मुद्दों की पहचान और समझौते के विभिन्न विकल्पों पर विचार करने जैसे व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिवक्ताओं की भूमिका को और प्रभावी बनाना है, ताकि वे मुकदमा दायर होने से पहले तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के दौरान उपयुक्त विवादों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने और आपसी सहमति से समझौता कराने में बेहतर योगदान दे सकें।

सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) के मास्टर ट्रेनर्स ने मध्यस्थता की प्रक्रिया, बातचीत की तकनीकों और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के मूलभूत सिद्धांतों से संबंधित अपनी विशेषज्ञता एवं व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →