मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। दोनों पर 30 हजार रुपये जुर्माना लगाए जाने की भी जानकारी दी गई है। मामले में मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या कर शव के टुकड़ों को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने का आरोप था।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत का फैसला, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए दोनों दोषी; फैसले के बाद परिवार की आंखें नम
मेरठ। उत्तर प्रदेश के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जिला अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने दोनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसले के समय दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया।
सुबह दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित
रिपोर्टों के अनुसार, जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने सुबह दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अभियोजन पक्ष ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने दोषियों के सुधार की संभावना का तर्क रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
शाम को अदालत ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। रिपोर्टों में बताया गया कि फैसला सुनाते समय अदालत ने अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी की। हालांकि, अदालत के आदेश की विस्तृत प्रमाणित प्रति से ही फैसले की सटीक कानूनी टिप्पणियों की पुष्टि की जा सकती है।
फैसले के बाद भावुक हुआ सौरभ का परिवार
फैसले के बाद सौरभ राजपूत के परिवार के सदस्य भावुक हो गए। वहीं, अदालत परिसर में मौजूद कुछ वकीलों ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया। मीडिया से बातचीत में वकीलों ने कहा कि मामले में कड़ी सजा जरूरी थी। फैसले के बाद वहां मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए।
क्या है पूरा नीला ड्रम हत्याकांड?
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में 3 मार्च 2025 को हुई सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट से बंद कर दिया गया था।
पुलिस ने इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों समेत अन्य सबूत पेश किए। रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे में कुल 22 लोगों की गवाही हुई।
आगे क्या होगा?
अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामलों में कानून के अनुसार उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का भी अधिकार है।
इसलिए जिला अदालत के फैसले के बाद अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।