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Ramayana Music Controversy: रामायण के म्यूजिक पर विवाद, एआर रहमान और कुमार विश्वास पर उठे सवाल

रणबीर कपूर की रामायण के गाने मंगल रंग और रावण तांडव पर चर्चा तेज। एआर रहमान के संगीत, कुमार विश्वास के बोल और सोशल मीडिया पर उठे सवालों की पूरी कहानी जानें।

Shubhi Mishra

• Sr Video Editor, Lucknow

7 मिनट लखनऊ

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Ramayana Music Controversy: रामायण के म्यूजिक पर विवाद, एआर रहमान और कुमार विश्वास पर उठे सवाल

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के म्यूजिक पर क्यों उठ रहे सवाल? एआर रहमान और कुमार विश्वास की बढ़ी मुश्किलें

 Ramayana Movie Music Controversy:  रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ रिलीज से पहले ही अपने भव्य सेट, दमदार स्टारकास्ट और शानदार विजुअल्स को लेकर चर्चा में है, लेकिन इस बार सुर्खियों की वजह फिल्म का संगीत भी बन गया है। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान की धुनों और गीतकार कुमार विश्वास के लिखे गानों पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। फिल्म के गाने ‘मंगल रंग’ और ‘रावण तांडव’ को लेकर कुछ दर्शकों ने संगीत की शैली, बोल और मौलिकता पर सवाल उठाए हैं। किसी ने भक्ति प्रसंग में सूफियाना रंग पर आपत्ति जताई, तो किसी ने रहमान के पुराने गानों से समानता का दावा किया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ‘रामायण’ का संगीत दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा?

25 अक्टूबर को रिलीज हुए गाने ‘मंगल रंग’ में भगवान राम और माता सीता के स्वयंवर, विवाह तथा सीता के अयोध्या आगमन से जुड़े प्रसंगों को दिखाया गया है। इस गीत को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसके बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं। गाने से दर्शकों को उम्मीद थी कि इसमें राम-सीता के विवाह की भव्यता, प्रेम और धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं को संगीत के जरिए खास अंदाज में पेश किया जाएगा। हालांकि, गाना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसकी धुन और संगीत संयोजन को लेकर सवाल उठाए। आलोचकों का कहना है कि गीत में पारंपरिक भक्ति संगीत के बजाय सूफियाना और कव्वाली जैसी शैली का प्रभाव सुनाई देता है, जबकि कुछ लोगों ने इसे एक अलग तरह का संगीत प्रयोग बताया। इसी के बाद गाने की धुन और प्रस्तुति को लेकर बहस तेज हो गई।

‘मंगल रंग’ को लेकर उठे सवालों में सबसे ज्यादा चर्चा एआर रहमान के पुराने संगीत से इसकी तुलना की हो रही है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने फिल्म ‘रॉकस्टार’ के लोकप्रिय गाने ‘कुन फाया कुन’ का जिक्र करते हुए कहा कि ‘मंगल रंग’ में भी उन्हें सूफियाना संगीत की झलक सुनाई देती है। इसके अलावा तमिल फिल्म ‘कंडुकोंडैन कंडुकोंडैन’ के गाने ‘एन्ना सोल्ला पोगिराई’ से भी इसकी तुलना की जा रही है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में दोनों गानों की धुन तथा संगीत संयोजन को लेकर समानता के दावे किए गए हैं। हालांकि, ये ऑनलाइन तुलनाएं और श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं हैं, इसलिए इनके आधार पर किसी तरह की नकल या कॉपी करने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस विवाद ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी बड़े संगीतकार की नई रचना में उसकी पुरानी शैली की झलक होना उसकी पहचान है या रचनात्मक दोहराव। एआर रहमान भारतीय फिल्म संगीत के उन चुनिंदा संगीतकारों में शामिल हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत, लोक धुनों, पश्चिमी ऑर्केस्ट्रेशन और सूफियाना अंदाज को मिलाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘रोजा’, ‘दिल से’, ‘रॉकस्टार’ और ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी फिल्मों में उनके संगीत को काफी सराहना मिली है। ऐसे में ‘रामायण’ जैसी महाकाव्य पर आधारित फिल्म से दर्शकों की अपेक्षाएं भी काफी ऊंची हैं। राम, सीता और रावण जैसे पात्र भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखते हैं, इसलिए दर्शक चाहते हैं कि संगीत कहानी के भाव, पात्रों के स्वभाव और प्रसंगों की गरिमा के साथ तालमेल बनाए। दूसरी ओर, किसी संगीतकार के लिए हर बार नई शैली अपनाना और अपनी रचनात्मक पहचान को आगे बढ़ाना भी बड़ी चुनौती होती है। यही वजह है कि ‘रामायण’ के संगीत को लेकर हो रही चर्चा केवल पसंद और नापसंद तक सीमित नहीं है, बल्कि मौलिकता, संगीत प्रयोग और सांस्कृतिक प्रस्तुति से भी जुड़ गई है।

‘मंगल रंग’ पहला गाना नहीं है, जिसे लेकर ‘रामायण’ के संगीत पर चर्चा हो रही है। इससे पहले फिल्म के ‘रावण तांडव’ को लेकर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ दर्शकों ने रावण की शिवभक्ति और तांडव जैसे प्रभावशाली प्रसंग के लिए संगीत से अधिक भव्यता और ऊर्जा की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने गीत के बोलों और प्रस्तुति पर भी अपनी राय रखी। सोशल मीडिया पर इसकी तुलना फिल्म ‘आदिपुरुष’ में शिव तांडव से जुड़े संगीत से भी की गई। हालांकि, ऐसी तुलनाएं दर्शकों की व्यक्तिगत पसंद और अपेक्षाओं को दिखाती हैं। किसी गीत की सफलता का आकलन केवल ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता, लेकिन बड़े बजट की फिल्म के संगीत को लेकर दर्शकों की अपेक्षाएं कितनी अधिक हैं, यह बहस उससे जरूर सामने आती है।

फिल्म के संगीत को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच एआर रहमान ने संगीत तैयार करने की प्रक्रिया और सोशल मीडिया पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में अपनी बात रखी। दिए गए विवरण के मुताबिक, रहमान ने कहा कि किसी संगीत रचना को तैयार करने में काफी मेहनत और दिमागी कसरत लगती है। लंबे समय तक विचार और रचनात्मक प्रक्रिया से गुजरने के बाद जब आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं मिलती हैं, तो हर प्रतिक्रिया पर सफाई देने की ऊर्जा नहीं बचती। उन्होंने अपने काम के प्रति ईमानदारी जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि लोग उनके संगीत को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनें और समझें। रहमान का यह भी कहना रहा कि वह ‘रॉकस्टार’ या ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी अपनी पुरानी सफलताओं के फॉर्मूले पर हमेशा निर्भर नहीं रह सकते। एक कलाकार के लिए नए प्रयोग करना और आगे बढ़ना जरूरी है। उनके इस नजरिए से यह सवाल भी सामने आता है कि किसी कलाकार की रचनात्मक यात्रा में नए प्रयोगों और दर्शकों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

‘रामायण’ के संगीत से जुड़ी चर्चा में गीतकार कुमार विश्वास का नाम भी सामने आ रहा है। पहले ‘रावण तांडव’ के बोलों को लेकर कुछ दर्शकों ने सवाल उठाए और अब ‘मंगल रंग’ के शब्दों तथा भावों पर भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि रामायण जैसे महाकाव्य के प्रसंगों में इस्तेमाल होने वाले शब्दों में विशेष गहराई, काव्यात्मकता और भावनात्मक प्रभाव होना चाहिए, जबकि दूसरे दर्शक गीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। ‘मंगल रंग’ में भगवान राम और माता सीता के प्रेम तथा विवाह से जुड़े प्रसंगों को गीत के माध्यम से पेश किया गया है। ऐसे विषयों के साथ दर्शकों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी होती हैं, इसलिए गीत के शब्दों और संगीत की प्रस्तुति को लेकर अलग-अलग राय सामने आना स्वाभाविक है।

‘मंगल रंग’ को लेकर जारी बहस के बीच कुमार विश्वास का एक वीडियो भी चर्चा में आया है। दिए गए विवरण के अनुसार, इस वीडियो में उन्होंने गीत के शब्दों के लिए भगवान के प्रति आभार जताया। उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि आने वाले समय में यह गाना विवाह समारोहों में इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद गीत को लेकर चर्चा का एक और पहलू सामने आया है। जहां कुछ दर्शक इसकी संगीत शैली और बोलों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं गीत से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि यह समय के साथ श्रोताओं के बीच अपनी जगह बना सकता है। हालांकि, किसी गीत को दर्शकों के बीच लोकप्रिय होने में कितना समय लगेगा, यह उसकी धुन, बोल, प्रस्तुति और लोगों की पसंद पर निर्भर करता है।

कुल मिलाकर, ‘रामायण’ के संगीत को लेकर हो रही बहस यह दिखाती है कि भारतीय दर्शक इस फिल्म से केवल भव्य दृश्य और बड़ी स्टारकास्ट ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली संगीत अनुभव की भी उम्मीद कर रहे हैं। एआर रहमान के सामने एक तरफ अपनी विशिष्ट संगीत शैली और नए प्रयोगों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ महाकाव्य की सांस्कृतिक संवेदनाओं और दर्शकों की अपेक्षाओं के साथ तालमेल बैठाने का सवाल भी है। वहीं, कुमार विश्वास के लिखे गीतों को लेकर उठ रही प्रतिक्रियाएं यह बताती हैं कि रामायण जैसे विषय पर शब्दों की प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए काफी मायने रखती है। फिलहाल ‘मंगल रंग’ और ‘रावण तांडव’ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। अंतिम तौर पर फिल्म का संगीत दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा, इसका आकलन फिल्म देखने और संगीत को पूरी तरह सुनने के बाद ही किया जा सकेगा।

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