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संसद का विशेष सत्र इसी महीने के अंत में संभव, परिसीमन और महिला आरक्षण पर फिर दांव लगाएगी सरकार!

केंद्र सरकार इसी महीने के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक दोबारा पेश किए जा सकते हैं।

Pawan Kumar
Pawan Kumar

4 मिनट नई दिल्ली

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संसद का विशेष सत्र इसी महीने के अंत में संभव, परिसीमन और महिला आरक्षण पर फिर दांव लगाएगी सरकार!

नई दिल्ली। संसद का विशेष सत्र अक्टूबर के आखिरी दिनों में बुलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार को भरोसा है कि लोकसभा में इन प्रस्तावों को पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या है। इसके बावजूद विधेयकों के समर्थन में संख्या मजबूत करने के लिए विपक्षी दलों से बातचीत की जा रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध तेज कर रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को दोबारा संसद में लाने की तैयारी पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश किए जाने के संबंध में अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

 लोकसभा में संख्या को लेकर आश्वस्त सरकार

सूत्रों के अनुसार, सरकार लोकसभा में अपनी संख्या को लेकर आश्वस्त है। इसी आधार पर वह विशेष सत्र के जरिए परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावों को आगे बढ़ाना चाहती है। सरकार की कोशिश है कि विधेयकों को सदन में पेश करने से पहले जरूरी राजनीतिक समर्थन सुनिश्चित कर लिया जाए।

इसके लिए विपक्षी दलों से संपर्क साधा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल विधेयकों को पेश करना ही नहीं, बल्कि उन्हें पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना भी बताया जा रहा है। फिलहाल सत्र की तारीख, कार्यसूची और विधायी कामकाज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चलने की जानकारी सामने आई है।

 मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं, विशेष बैठक की संभावना

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। यानी सदन की नियमित बैठकें समाप्त होने के बावजूद सत्र को आधिकारिक रूप से बंद नहीं किया गया था।

इसी स्थिति के चलते सरकार के लिए उसी सत्र के तहत विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विशेष बैठक से पहले लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है। हालांकि, यह समय-सीमा और बैठक की तारीखों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

अप्रैल में लोकसभा से पारित नहीं हो पाया था विधेयक

सरकार की मौजूदा तैयारी को अप्रैल में संसद में मिली असफलता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था। विधेयक को जरूरी समर्थन नहीं मिला था।

अब सरकार इसी मुद्दे पर दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है। विशेष सत्र के जरिए प्रस्तावों को फिर संसद के सामने लाने और उनके समर्थन में आवश्यक संख्या जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, पहले के विधेयक और इस बार प्रस्तावित विधायी प्रक्रिया के विवरण की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

 डीएमके समेत छोटे विपक्षी दलों से संपर्क की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सहित कुछ छोटे विपक्षी दलों के संपर्क में है। इन दलों से बातचीत को विधेयकों के समर्थन में संख्या मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

डीएमके और कांग्रेस के संबंधों को लेकर राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव की खबरों के बीच सरकार के इस संपर्क की चर्चा सामने आई है। हालांकि, किसी विपक्षी दल ने विधेयकों को समर्थन देने का अंतिम फैसला किया है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

संसद में संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। ऐसे में विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बातचीत और दलों के रुख पर सबकी नजर रहेगी।

 26 और 27 अक्टूबर के कार्यक्रम का भी रखा जाएगा ध्यान

विशेष सत्र की संभावित तारीख तय करते समय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखे जाने की बात कही जा रही है। यह कार्यक्रम 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होना है। ऐसे में सरकार की ओर से विशेष बैठक की तारीख तय करते समय इन कार्यक्रमों को ध्यान में रखा जा सकता है।

दूसरी ओर, विपक्ष एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित विधेयकों को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

 अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार

फिलहाल विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना सूत्रों के हवाले से सामने आई है। सत्र की निश्चित तारीख, कार्यसूची और विधेयकों को पेश किए जाने के संबंध में सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे संसद के प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार को विपक्षी दलों से कितना समर्थन मिलता है और प्रस्तावित विधेयकों पर सदन में क्या रुख सामने आता है।

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