सुल्तानपुर। गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा की भूमि और दुकानों से जुड़े विवाद को लेकर व्यापारियों ने मौन जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा बचाओ संघर्ष समिति से जुड़े दुकानदारों ने नगर के विभिन्न इलाकों में पत्रक वितरित कर लोगों को मामले की जानकारी दी और अपने आंदोलन में सहयोग की अपील की। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले लगभग 60 से 65 वर्षों से नगर पालिका को किराया देकर मंडी परिसर में कारोबार कर रहे हैं। इन दुकानों से न केवल उनका, बल्कि उनके परिवारों का भरण-पोषण भी होता है। ऐसे में भूमि और दुकानों से जुड़ा विवाद उनके भविष्य और आजीविका के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। दुकानदारों के मुताबिक, अगस्त 2026 में उन्हें मंडी की भूमि से संबंधित न्यायालय में विचाराधीन विवाद की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने पुराने अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाही के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
पुराने न्यायिक फैसलों और भूमि के अभिलेखों पर उठाए सवाल
संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, वर्ष 1967 में विशंभर दयाल अग्रवाल से संबंधित कथित बैनामे को न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने और वर्ष 1983 में जिला न्यायालय के फैसले में भूमि को राज्य सरकार की भूमि बताए जाने से संबंधित तथ्य सामने आए हैं। व्यापारियों का दावा है कि वर्ष 1983 के निर्णय के विरुद्ध नगर पालिका ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में अपील संख्या 608/83 दाखिल की थी।
दुकानदारों के मुताबिक, यह अपील 31 जुलाई 2025 को नगर पालिका के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण अदम पैरवी में खारिज हो गई। इसके बाद, व्यापारियों का आरोप है कि 19 मार्च 2026 को वर्ष 1983 के फैसले के आधार पर रामनिवास अग्रवाल एवं अन्य के नाम पट्टे किए गए। समिति ने भूमि से संबंधित अभिलेखों और इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
ये सभी तथ्य और आरोप संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों की ओर से सामने रखे गए हैं। प्रकरण के सभी पहलुओं, संबंधित न्यायिक आदेशों और भूमि के स्वामित्व की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
नगर पालिका के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
व्यापारियों ने नगर पालिका के संबंधित अधिकारियों और नगर पालिका अध्यक्ष की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि न्यायालय में प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण मंडी में वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
समिति का कहना है कि मामले में पारदर्शिता जरूरी है और भूमि से जुड़े सभी पुराने दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। व्यापारियों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें
गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा बचाओ संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:
- पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- मंडी की भूमि एवं दुकानों से जुड़े पुराने राजस्व और अन्य अभिलेखों की जांच की जाए।
- जांच पूरी होने तक दुकानदारों के हितों को प्रभावित करने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
- यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- दशकों से किराया देकर कारोबार कर रहे व्यापारियों की आजीविका और व्यवसाय के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना और न्यायसंगत समाधान हासिल करना है।
मौन जुलूस के जरिए शासन-प्रशासन तक पहुंचाई आवाज
मौन जुलूस के दौरान व्यापारियों ने विरोध दर्ज कराने के साथ नगरवासियों के बीच पत्रक भी वितरित किए। इन पत्रकों के माध्यम से उन्होंने लोगों को मंडी की भूमि और दुकानों से जुड़े विवाद की जानकारी दी। व्यापारियों की इस पहल की नगर में चर्चा रही। समिति ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है।
प्रदर्शन में मुन्नालाल जायसवाल, शंकरलाल कैलाशी, मनीष साहू, रवि, संतोष अग्रवाल, सोमदत्त अग्रवाल, हर्ष अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, उमाशंकर अग्रहरि, राहुल अग्रहरि, संजय जेठू, संजय अग्रवाल, दिलीप अग्रहरि, विपिन, शिवम, अंकित, विशाल साहू, धीरज, प्रिंस सरदार, खलीक, मित्ते सरदार, सोनल, राजकुमार साईं, अजय जायसवाल, शैलेन्द्र अग्रहरि और संदीप कसौधन (गल्ला) सहित सैकड़ों व्यापारी मौजूद रहे।
‘दुकानें ही हमारी रोजी-रोटी का आधार’
संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों ने कहा कि गल्ला मंडी की दुकानें उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं। ऐसे में भूमि और दुकानों से जुड़े विवाद का समाधान इस तरह होना चाहिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी बना रहे और वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों के हितों पर भी उचित विचार किया जाए।
व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने की अपील की। उनका संदेश है— हमारी दुकानें ही हमारी रोजी-रोटी का आधार हैं, न्याय मिले और रोजगार बचे।