पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत को लेकर अदालत से झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 9 मई 2026 को कथित करीब 100 करोड़ रुपये के GST धोखाधड़ी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। इससे पहले गुरुग्राम की विशेष PMLA अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है।
ED ने 9 मई को किया था गिरफ्तार, मोबाइल फोन कारोबार में कथित 100 करोड़ रुपये की GST धोखाधड़ी से जुड़े मामले की जांच जारी
चंडीगढ़। पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा को जमानत के मामले में बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। अरोड़ा फिलहाल गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद हैं। उन पर कथित मनी लॉन्ड्रिंग और मोबाइल फोन कारोबार से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। हालांकि, मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
9 मई को ED ने किया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने संजीव अरोड़ा को 9 मई को उनके सरकारी आवास से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद अरोड़ा ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी हिरासत को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की थी। उन्होंने गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने के साथ ही गिरफ्तारी के बाद दी गई रिमांड को रद्द करने का अनुरोध भी किया था।
हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद फिलहाल उनकी रिहाई का रास्ता साफ नहीं हुआ है। अदालत के आदेश का विस्तृत विवरण सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमानत खारिज करने के पीछे किन कानूनी आधारों और तथ्यों को प्रमुखता दी गई।
100 करोड़ रुपये की कथित GST धोखाधड़ी की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, संजीव अरोड़ा और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मोबाइल फोन की बिक्री और निर्यात से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के GST घोटाले की जांच की जा रही है। इसी सिलसिले में ED ने पंजाब और दिल्ली-NCR के कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था।
जांच के दायरे में अरोड़ा की कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड भी है, जिसका पुराना नाम रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज बताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, चंडीगढ़, दिल्ली-NCR और पंजाब के लुधियाना तथा जालंधर में तलाशी की गई थी। एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
पहले भी ED की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं अरोड़ा
संजीव अरोड़ा को इससे पहले वर्ष 2024 में भी ED की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस समय वह राज्यसभा सांसद थे और लुधियाना पश्चिम से विधायक बनने से पहले औद्योगिक जमीन को आवासीय परियोजनाओं में बदलने से जुड़े कथित मामले में उनके ठिकानों पर तलाशी ली गई थी।
9 मई को हुई गिरफ्तारी के बाद भी जांच एजेंसी की कार्रवाई चर्चा में रही। इस मामले में अब जमानत याचिका खारिज होने से कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण महत्वपूर्ण हो गया है।
कंपनी ने आरोपों से किया था इनकार
संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने एक बयान जारी कर आरोपों से इनकार किया था। कंपनी का कहना था कि मोबाइल फोन निर्यात के कारोबार में उसने सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन किया है। कंपनी के मुताबिक, उसने मई 2023 में मोबाइल फोन निर्यात के कारोबार में कदम रखा था।
कंपनी के इस पक्ष और ED की जांच के बीच मामले का अंतिम निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल संजीव अरोड़ा को जमानत नहीं मिली है और उनके खिलाफ दर्ज मामले में जांच तथा कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ने की संभावना है।