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अयोध्या: सरयू खतरे के निशान से 17 सेमी ऊपर, रुदौली के मांझा गांव चार महीने से पानी में

अयोध्या में सरयू नदी 92.9 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर है। रुदौली तहसील के काठी मांझा, पटरंगा मांझा और मरौचा मांझा गांवों के लोग चार महीने से बाढ़ झेल रहे हैं। प्रशासन ने राहत सामग्री, पशु चारा और नाव की व्यवस्था की है।

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मुख्य संपादक

2 मिनट अयोध्या

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अयोध्या: सरयू खतरे के निशान से 17 सेमी ऊपर, रुदौली के मांझा गांव चार महीने से पानी में
अयोध्या में सरयू नदी का घाट — प्रतीकात्मक फोटो: Gamerzer / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

मानसून विदा होने की ओर है, लेकिन अयोध्या में सरयू नदी का पानी अब भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। गुरुवार को सरयू का जलस्तर 92.9 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी किनारे बसे रुदौली तहसील के मांझा इलाके के गांव सबसे ज्यादा परेशान हैं।

काठी मांझा, पटरंगा मांझा और मरौचा मांझा गांवों में हर साल करीब छह महीने तक बाढ़ का असर रहता है। इस बार चार महीने से जलस्तर ऊपर-नीचे होने से हालात और खराब हो गए हैं।

अयोध्या में सरयू नदी का घाट
अयोध्या में सरयू नदी का घाट — प्रतीकात्मक फोटो: Aliva Sahoo / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

बच्चों की पढ़ाई और रोजी-रोटी पर असर

गांवों के चारों ओर पानी भरा होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। बहुत से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। खेत डूबे होने से रोजगार और रोज की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। पशुओं के लिए चारे की भारी किल्लत है।

प्रशासन की ओर से मदद

प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री बांटी है और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया है। आने-जाने के लिए नावें लगाई गई हैं। पटरंगा मांझा के एक ग्रामीण का कहना है कि नाव की सुविधा से आने-जाने में कुछ राहत मिली है। हालांकि ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें हर साल की इस परेशानी से स्थायी छुटकारा दिलाया जाए और सुरक्षित जगह पर बसाया जाए।

मुख्य बातें

  • सरयू का जलस्तर: 92.9 मीटर
  • खतरे के निशान से: 17 सेंटीमीटर ऊपर
  • प्रभावित गांव: काठी मांझा, पटरंगा मांझा, मरौचा मांझा (तहसील रुदौली)
  • राहत: राशन-सामग्री, पशु चारा, नाव

नदी किनारे रहने वाले सावधान रहें

जलस्तर ऊपर रहने तक नदी में नहाने या मवेशी लेकर उतरने से बचें। बच्चों को पानी भरे इलाकों में अकेले न जाने दें। नाव में क्षमता से ज्यादा लोग न बैठें। बाढ़ से जुड़ी किसी भी मदद के लिए तहसील या जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। बाराबंकी में भी सरयू (घाघरा) की कटान से कई गांवों में घर और खेत नदी में समा चुके हैं।

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