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UP News: जन औषधि केंद्रों पर 10% महंगी हुईं दवाएं, BP-शुगर समेत रोजाना इस्तेमाल की दवाओं पर असर

आम लोगों को महंगाई का झटका लगा है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर ब्लड प्रेशर, शुगर, बुखार, दर्द निवारक और विटामिन समेत रोजाना इस्तेमाल होने वाली 200 से अधिक दवाओं की कीमतों में करीब 10% तक बढ़ोतरी की खबर है।

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Pawan Kumar

2 मिनट लखनऊ

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UP News: जन औषधि केंद्रों पर 10% महंगी हुईं दवाएं, BP-शुगर समेत रोजाना इस्तेमाल की दवाओं पर असर
त्तर प्रदेश में सस्ती दवाओं के लिए पहचाने जाने वाले प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सस्ती दवाओं के लिए पहचाने जाने वाले प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे उन मरीजों की जेब पर असर पड़ सकता है, जो ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बीमारियों की दवाएं नियमित रूप से खरीदते हैं। फार्मा कंपनियों के मुताबिक, कच्चे माल की लागत और दवाओं के निर्माण खर्च में बढ़ोतरी के चलते कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।

BP और शुगर समेत 200 से ज्यादा दवाएं महंगी

राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में संचालित जन औषधि केंद्रों पर करीब 400 से अधिक तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। इनमें से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली 200 से ज्यादा दवाएं कीमतों में बढ़ोतरी के दायरे में आई हैं।

इनमें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बुखार, दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और विटामिन से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीज नियमित रूप से करते हैं। ऐसे में कीमतें बढ़ने से लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों का मासिक खर्च बढ़ सकता है।

 कच्चे माल और निर्माण लागत बढ़ने का हवाला

फार्मा कंपनियों का कहना है कि दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और निर्माण खर्च में इजाफा होने के कारण दवाओं के दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं, जन औषधि केंद्र संचालकों के अनुसार, नई कीमतों को अपडेट कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों का उद्देश्य लोगों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मरीजों के बीच इन दवाओं की किफायत को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

 नियमित दवा लेने वाले मरीजों पर पड़ेगा असर

ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों में मरीजों को अक्सर लंबे समय तक दवाएं लेनी पड़ती हैं। इसके अलावा, बुजुर्गों और एक से अधिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी नियमित रूप से कई दवाओं की जरूरत होती है। कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से ऐसे मरीजों का इलाज संबंधी बजट प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, हर दवा की कीमत में एक समान बढ़ोतरी हुई है या नहीं, यह संबंधित दवा की संशोधित कीमत पर निर्भर करेगा। दवा खरीदने से पहले मरीज केंद्र पर उपलब्ध नई कीमत की पुष्टि कर सकते हैं।

 सस्ती दवाओं की योजना पर क्या होगा असर?

जन औषधि केंद्रों के जरिए मरीजों को बाजार में उपलब्ध कई ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले कम कीमत पर जेनेरिक विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन दवाओं की कीमतें बढ़ने से मरीजों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि उनकी नियमित दवाओं के नए दाम कितने हैं और दूसरे विकल्पों की तुलना में कितनी बचत हो रही है।

फिलहाल, दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कंपनियों ने कच्चे माल और निर्माण लागत को वजह बताया है। मरीजों को सलाह है कि डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें या उसका विकल्प न बदलें। किसी दूसरी दवा पर जाने से पहले चिकित्सक या फार्मासिस्ट से परामर्श जरूर लें।

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