सूत्रों और वायरल दावों में यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले के पीछे एक गैंग की भूमिका हो सकती है, जो कथित तौर पर निजी वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें फैलाने या ब्लैकमेलिंग में शामिल रहता है। लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस तरह के संगठन या गैंग के अस्तित्व की आधिकारिक पुष्टि की है। पुलिस की ओर से भी फिलहाल इस मामले में कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर इस तरह के मामलों के तेजी से फैलने के कारण अक्सर अफवाह और वास्तविकता के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पुष्टि के किसी भी व्यक्ति का नाम या निजी विवरण साझा करना कानूनी रूप से भी गलत हो सकता है और इससे संबंधित लोगों की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और जांच या आधिकारिक बयान आने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आ सकेंगे। तब तक इसे अपुष्ट और सोशल मीडिया आधारित दावा ही माना जा रहा है।







