विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ गिरने, ओले पड़ने, बाढ़, तूफान या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को “एक्ट ऑफ नेचर” श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देनी चाहिए, नुकसान की तस्वीरें लेनी चाहिए और कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर के निरीक्षण के बाद क्लेम प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
क्लेम मंजूर होने पर मरम्मत का खर्च पॉलिसी की शर्तों के अनुसार इंश्योरेंस कंपनी वहन करती है। यदि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू (IDV) के आधार पर भुगतान किया जा सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी पॉलिसी की शर्तों और कवरेज को समय-समय पर जांचते रहें, ताकि आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान कम हो सके।








