वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर अब शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बीते करीब 100 दिनों में निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है और बाजार पूंजीकरण से लगभग 8 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बाजार पर दबाव बना रही है। इसका असर कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों पर देखने को मिला है, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू प्रभावित हुई है।

बाजार जानकारों के अनुसार निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और अपने निवेश की समीक्षा करनी चाहिए। जिन कंपनियों की बुनियादी स्थिति मजबूत है, उनमें लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकते हैं। फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।