वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल कम होती दिखाई दे रही है, जिससे भारत को कुछ राहत मिली है। हालांकि अब अर्थव्यवस्था के सामने एक नई चुनौती कमजोर मानसून के रूप में उभर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कमजोर मानसून का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे खाद्यान्न उत्पादन, जल भंडारण और बिजली उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होने से देश की समग्र आर्थिक वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल तेल की कीमतों में राहत सकारात्मक संकेत है, लेकिन आने वाले हफ्तों में मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि बारिश सामान्य स्तर पर पहुंचती है तो आर्थिक जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है। सरकार और संबंधित एजेंसियां भी कृषि और खाद्य आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।