देशभर में बढ़ती भीषण गर्मी अब सिर्फ असहज मौसम नहीं, बल्कि गंभीर आपदा का रूप लेती दिख रही है। हर साल हीटवेव के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा रही है, लेकिन पिछले 5 साल के आंकड़े इस खतरे की भयावह तस्वीर सामने रखते हैं। सरकारी और विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, लू और अत्यधिक तापमान के चलते कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों की मौतें दर्ज की गई हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल रहे हैं, जहां गर्मी ने जानलेवा रूप लिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, शहरी हीट आइलैंड प्रभाव और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इस संकट को और गंभीर बना रही हैं। कई मामलों में मजदूर, बुजुर्ग, बच्चे और खुले में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं। आंकड़े बताते हैं कि हर साल गर्मी से होने वाली मौतों का दायरा बढ़ता जा रहा है और कई बार वास्तविक संख्या दर्ज आंकड़ों से अधिक होने की आशंका भी जताई जाती है।
पिछले पांच वर्षों के रुझान देखें तो कई राज्यों में हीटवेव के दिनों की संख्या बढ़ी है, जिससे मौतों और बीमारियों दोनों में इजाफा हुआ है। कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से हालात और चिंताजनक बने। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ती रही।







