सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक योजनाओं के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एच.आर. मैकमास्टर ने सऊदी अरब के नए सुरक्षा गठबंधनों पर अपनी राय रखी है। 18 सितंबर को ANI से बातचीत…
सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक योजनाओं के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एच.आर. मैकमास्टर ने सऊदी अरब के नए सुरक्षा गठबंधनों पर अपनी राय रखी है। 18 सितंबर को ANI से बातचीत में उन्होंने मक्का रक्षा समझौते समेत सऊदी अरब के पाकिस्तान और तुर्किये के साथ बढ़ते सुरक्षा सहयोग का जिक्र किया। मैकमास्टर के मुताबिक, क्षेत्रीय स्थिरता सऊदी अरब की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विजन 2030 के लिए महत्वपूर्ण है।
7 अगस्त को हुआ था मक्का रक्षा समझौता
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते को तीनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
समझौते में रक्षा और विदेश मंत्रियों तथा सैन्य नेतृत्व के स्तर पर समन्वय बढ़ाने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और वायु रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की बात कही गई है। समझौते के बाद इसे लेकर अलग-अलग देशों और रणनीतिक विशेषज्ञों की ओर से क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा हुई है।
पाकिस्तान की भूमिका पर मैकमास्टर ने जताया संदेह
मैकमास्टर ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस समझौते की प्रतिबद्धताओं को व्यवहार में किस तरह लागू करता है। उन्होंने पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक टिप्पणियां की हैं। अप्रैल 2026 में भी उन्होंने पाकिस्तान पर अलग-अलग रणनीतिक हितों के साथ एक साथ काम करने का आरोप लगाया था।
मक्का समझौते को लेकर मैकमास्टर की ओर से यह भी आकलन सामने आया कि इसकी वास्तविक प्रभावशीलता को समय के साथ परखा जाएगा। हालांकि, उनके इस आकलन के समर्थन में कोई स्वतंत्र सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।
तुर्किये की नीतियों पर भी टिप्पणी
मैकमास्टर ने तुर्किये की मौजूदा सरकार की नीतियों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां तुर्किये के लोगों के बारे में नहीं, बल्कि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की सरकार और सत्तारूढ़ एके पार्टी की नीतियों को लेकर हैं।
उन्होंने तुर्किये की क्षेत्रीय और विदेश नीति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं और सऊदी अरब के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय साझेदारियों के साथ सुरक्षा संतुलन बनाए रखने की चुनौती का उल्लेख किया।
सऊदी अरब के लिए सुरक्षा क्यों अहम?
मैकमास्टर के अनुसार, सऊदी अरब की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र में स्थिर सुरक्षा वातावरण जरूरी है। उन्होंने विजन 2030 के तहत सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में बदलाव की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक विकास को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए सुरक्षा और स्थिरता आवश्यक है।
मक्का रक्षा समझौते के जरिए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने सामूहिक सुरक्षा सहयोग का एक नया ढांचा बनाया है। अब इसकी वास्तविक उपयोगिता और तीनों देशों की प्रतिबद्धताओं का असर आने वाले समय में क्षेत्रीय घटनाक्रम और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच देखा जाएगा।