एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन वे नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर अपनी ड्यूटी निभाते रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब तीन साल तक उनकी स्कूल में नियमित हाजिरी भी दर्ज होती रही, जबकि सरकारी फाइलों में उनका नाम मृतकों की सूची में शामिल था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब सेवा अभिलेखों और विभागीय दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में हुई एक बड़ी त्रुटि के कारण शिक्षक को मृत दर्शा दिया गया था। दूसरी ओर, स्कूल स्तर पर उनकी उपस्थिति और कार्य सामान्य रूप से जारी रहे, जिससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा विरोधाभास पैदा हो गया।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गलती कैसे हुई। साथ ही, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।








