आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में जहां सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं अब एक नई रिपोर्ट ने सबका ध्यान इलेक्ट्रिशियन, HVAC टेक्नीशियन और अन्य स्किल्ड ट्रेड्स की ओर खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI और डेटा सेंटर इंडस्ट्री के तेज विस्तार के चलते अनुभवी और अत्यधिक कुशल Gen Z इलेक्ट्रिशियन को करोड़ों रुपये तक के सालाना पैकेज की पेशकश की जा रही है। कुछ मामलों में कुल वेतन, बोनस और अन्य लाभों को मिलाकर यह पैकेज करीब ₹2.7 करोड़ (लगभग 3 लाख डॉलर से अधिक) तक पहुंच रहा है।
AI डेटा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इन्हें चलाने के लिए हाई-वोल्टेज बिजली व्यवस्था, पावर बैकअप, कूलिंग सिस्टम और जटिल इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। ऐसे में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल रखने वाले प्रशिक्षित इलेक्ट्रिशियन और तकनीकी विशेषज्ञों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश नए डेटा सेंटर बनाने में कर रही हैं। इन परियोजनाओं में बिजली आपूर्ति और सुरक्षा सबसे अहम हिस्सा होती है। यदि कोई इलेक्ट्रिशियन हाई-वोल्टेज सिस्टम, इंडस्ट्रियल वायरिंग, ऑटोमेशन और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का अनुभव रखता है, तो उसे सामान्य नौकरियों की तुलना में कई गुना अधिक वेतन मिल सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Gen Z के कई युवा पारंपरिक चार वर्षीय डिग्री की बजाय स्किल-आधारित ट्रेनिंग, अप्रेंटिसशिप और ट्रेड सर्टिफिकेशन की ओर बढ़ रहे हैं। इसका फायदा उन्हें सीधे रोजगार और बेहतर वेतन के रूप में मिल रहा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹2.7 करोड़ का पैकेज सभी इलेक्ट्रिशियन को नहीं मिल रहा है। यह आंकड़ा कुछ चुनिंदा विशेषज्ञों, खासकर अमेरिका जैसे देशों में AI डेटा सेंटर और हाई-एंड औद्योगिक परियोजनाओं में काम करने वाले अत्यधिक अनुभवी पेशेवरों के कुल वार्षिक मुआवजे (Total Compensation) से जुड़ा बताया जा रहा है।
भारत में भी AI, सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर सेक्टर के विस्तार के साथ स्किल्ड टेक्निकल प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिशियन, मशीन टेक्नीशियन और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
तकनीकी जानकारों का कहना है कि AI के दौर में केवल कोडिंग ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाले कुशल तकनीशियनों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि आज के समय में “हुनर” कई क्षेत्रों में पारंपरिक डिग्री से भी ज्यादा मूल्यवान साबित हो रहा है।








