चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर 2026 से अमेरिका के राजकीय दौरे पर हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा 23 से 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस यात्रा को इसलिए भी…
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर 2026 से अमेरिका के राजकीय दौरे पर हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा 23 से 25 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी।
इस यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप खुद शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर स्वागत करेंगे। व्हाइट हाउस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का एयरफील्ड पर व्यक्तिगत रूप से पहुंचना असामान्य प्रोटोकॉल माना जाता है।
व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर
24 सितंबर को व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के सम्मान में औपचारिक स्टेट अराइवल सेरेमनी आयोजित होगी। इसके बाद शाम को ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप की मेजबानी में स्टेट डिनर होगा। समारोह में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
शी जिनपिंग और ट्रंप की इस साल यह दूसरी बड़ी आमने-सामने मुलाकात है। इससे पहले मई 2026 में ट्रंप चीन के दौरे पर गए थे और बीजिंग में दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी।
ट्रेड और टैरिफ पर रहेगी नजर
दोनों नेताओं की बातचीत में अमेरिका-चीन व्यापार संबंध अहम मुद्दा रहने की संभावना है। टैरिफ, व्यापार संतुलन और दोनों देशों के बीच चल रही आर्थिक व्यवस्थाओं पर चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई और उनसे जुड़ी निर्यात नीतियां भी महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। इन खनिजों की वैश्विक सप्लाई में चीन की बड़ी भूमिका है और इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर अत्याधुनिक तकनीक तक कई क्षेत्रों में होता है।
AI और तकनीक भी एजेंडे में
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी ट्रंप-जिनपिंग वार्ता का प्रमुख विषय हो सकता है। दोनों देश AI और अत्याधुनिक तकनीक में अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और निवेश से जुड़े कई मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
ताइवान पर भी होगी नजर
ताइवान दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों में से एक है। रॉयटर्स के अनुसार, शी जिनपिंग अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग उठा सकते हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की आत्मरक्षा के समर्थन की नीति रखता है।
रूस और ईरान का मुद्दा भी अहम
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव और रूस से जुड़े प्रतिबंध भी चर्चा में आ सकते हैं। चीन रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ा संघर्ष भी दोनों नेताओं की बातचीत के संभावित मुद्दों में शामिल हो सकता है।
कुल मिलाकर, शी जिनपिंग की यह यात्रा व्यापार, तकनीक, ताइवान और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर अमेरिका-चीन संबंधों के लिए अहम बैठक के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, वार्ता से क्या ठोस समझौते निकलते हैं, इसका पता बैठक के बाद ही चलेगा।