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AI का बुलबुला फूटने की आहट! अमेरिका-चीन के शेयर बाजार में हाहाकार, खरबों डॉलर का निवेश खतरे में, भारत पर भी मंडराया संकट

AI का बुलबुला फूटने की आहट! अमेरिका-चीन के शेयर बाजार में हाहाकार, खरबों डॉलर डूबे, भारत पर भी संकट

Deepika

• Sr. Video Editor, Lucknow

7 मिनट नई दिल्ली

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AI का बुलबुला फूटने की आहट! अमेरिका-चीन के शेयर बाजार में हाहाकार, खरबों डॉलर का निवेश खतरे में, भारत पर भी मंडराया संकट

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बताया जा रहा था। दावा किया जा रहा था कि AI आने वाले समय में कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और इंसानी जिंदगी को पूरी तरह बदल देगा। इसी उम्मीद के साथ दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों और निवेशकों ने इस तकनीक पर खरबों डॉलर का निवेश किया। लेकिन अब AI की चमक के पीछे छिपी आर्थिक चुनौतियां सामने आने लगी हैं। भारी निवेश के बावजूद कंपनियों को उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में दुनिया भर के शेयर बाजारों में AI को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अमेरिका से लेकर चीन, दक्षिण कोरिया और जापान तक AI की दौड़ में शामिल देशों के सामने आर्थिक जोखिम खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर AI पर किया गया भारी-भरकम निवेश कंपनियों को पर्याप्त कमाई नहीं दे पाया, तो इसका असर केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैंकिंग, शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

AI कंपनियों के सामने सबसे बड़ा संकट क्या है?

पिछले कुछ वर्षों में AI को लेकर दुनियाभर में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ओपनAI, एनवीडिया और मेटा जैसी बड़ी कंपनियों ने AI मॉडल, डेटा सेंटर, चिप और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए भारी निवेश किया। निवेशकों को उम्मीद थी कि AI आने वाले समय में कंपनियों की कमाई में जबरदस्त इजाफा करेगा।

लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि AI से वास्तव में कितना मुनाफा हो रहा है और इस पर खर्च किए जा रहे अरबों-खरबों डॉलर की भरपाई कब तक होगी। AI मॉडल तैयार करने और उन्हें चलाने में महंगे सर्वर, बिजली, एडवांस चिप और डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है। इन सब पर लगातार भारी खर्च हो रहा है।

समस्या यह है कि AI सेवाओं से होने वाली कमाई अभी कई कंपनियों के भारी निवेश के मुकाबले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि निवेशक अब कंपनियों के भविष्य के मुनाफे और उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन करने लगे हैं।

अमेरिका के शेयर बाजार में क्यों मचा हाहाकार?

AI की वैश्विक दौड़ में अमेरिका सबसे आगे रहा है। यहां की बड़ी टेक कंपनियों ने AI को भविष्य का सबसे बड़ा कारोबार मानते हुए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ओपनAI, एनवीडिया और मेटा जैसी कंपनियां इस तकनीकी बदलाव के केंद्र में हैं।

लेकिन 5 नवंबर को अमेरिकी शेयर बाजार में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नैस्डैक-100 में करीब 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार में एक ही दिन में लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के बाजार मूल्य का नुकसान हुआ, जिसमें करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान AI से जुड़ी कंपनियों को हुआ।

इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में सवाल उठ रहे हैं कि क्या AI कंपनियों का मौजूदा मूल्यांकन उनकी वास्तविक कमाई के हिसाब से बहुत ज्यादा हो गया है? अगर कंपनियां अपने निवेश के अनुरूप मुनाफा नहीं कमा पाती हैं, तो शेयरों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

चीन ने भी AI पर लगाया बड़ा दांव

AI के क्षेत्र में अमेरिका को चीन से कड़ी टक्कर मिल रही है। चीन ने भी सेमीकंडक्टर, AI हार्डवेयर, डेटा सेंटर और तकनीकी स्टार्टअप्स में भारी निवेश किया है। चीन की सरकार और कंपनियां इस तकनीक को भविष्य की आर्थिक ताकत के रूप में देख रही हैं।

लेकिन AI से अपेक्षित कमाई नहीं होने की स्थिति में चीन के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अगर AI कंपनियों का कारोबार उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ता, तो तकनीकी स्टार्टअप्स, निवेशकों और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

चीन की अर्थव्यवस्था में तकनीकी उद्योग की अहम भूमिका है। ऐसे में AI से जुड़े निवेश पर मिलने वाला कमजोर रिटर्न औद्योगिक विकास और वित्तीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

दक्षिण कोरिया और ताइवान पर भी पड़ सकता है असर

AI तकनीक के विस्तार में सेमीकंडक्टर यानी चिप की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बेहद शक्तिशाली चिप की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में ताइवान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं।

ताइवान की TSMC और दक्षिण कोरिया की सैमसंग तथा SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां एडवांस चिप निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। AI की मांग बढ़ने के अनुमान के आधार पर इन कंपनियों ने अपने उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश किए हैं।

लेकिन अगर AI की मांग घटती है या कंपनियां निवेश की रफ्तार कम करती हैं, तो चिप बनाने वाली कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारी बिकवाली के कारण गुरुवार को करीब 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इससे पता चलता है कि AI से जुड़ी आशंकाओं का असर अब वैश्विक बाजारों में दिखाई देने लगा है।

जापान की कंपनियों के लिए भी बढ़ी चिंता

जापान AI और रोबोटिक्स को अपने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है। देश में घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए AI और ऑटोमेशन को बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

जापानी कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। सॉफ्टबैंक जैसी बड़ी निवेशक कंपनियों ने भी AI स्टार्टअप्स में भारी पैसा लगाया है।

ऐसे में अगर AI से जुड़े प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं देते हैं, तो जापानी निवेशकों और कंपनियों को बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भारत के लिए भी क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

AI के इस वैश्विक संकट का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत दुनिया के बड़े IT सर्विसेज, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और BPO केंद्रों में शामिल है। देश की कई कंपनियां अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों को तकनीकी सेवाएं देती हैं।

अगर वैश्विक कंपनियां AI पर अपना खर्च कम करती हैं या निवेश की रणनीति बदलती हैं, तो भारतीय IT कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा AI के कारण रोजगार के स्वरूप में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

एक तरफ AI कई नए अवसर पैदा कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक सॉफ्टवेयर और आउटसोर्सिंग से जुड़े कामों की मांग में बदलाव आ सकता है। ऐसे में भारतीय IT सेक्टर को नई तकनीक के अनुसार खुद को ढालना होगा।

आखिर क्यों कमजोर पड़ रहा है AI का निवेश मॉडल?

AI के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत और कमाई के बीच संतुलन बनाना है। बड़े AI मॉडल तैयार करने के लिए महंगे कंप्यूटर, एडवांस चिप, डेटा सेंटर और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इन संसाधनों पर कंपनियों को लगातार खर्च करना पड़ता है।

कई कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए कर्ज लेकर भी निवेश कर रही हैं। अगर आने वाले समय में AI सेवाओं से पर्याप्त राजस्व नहीं मिलता, तो इन कंपनियों पर कर्ज चुकाने और खर्च नियंत्रित करने का दबाव बढ़ सकता है।

निवेशकों की चिंता यही है कि AI से भविष्य में कमाई की संभावनाएं तो बहुत बड़ी दिखाई जा रही हैं, लेकिन उस कमाई तक पहुंचने का रास्ता अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

क्या सच में फूटने वाला है AI का बुलबुला?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI तकनीक पूरी तरह असफल हो गई है या इसका बुलबुला निश्चित रूप से फूट चुका है। AI का इस्तेमाल आज भी कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन मौजूदा बाजार गिरावट ने यह जरूर दिखा दिया है कि केवल भविष्य की उम्मीदों के आधार पर कंपनियों का मूल्यांकन हमेशा ऊंचा नहीं रखा जा सकता।

अब निवेशक AI कंपनियों से वास्तविक कमाई, मुनाफे और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का हिसाब मांग रहे हैं। आने वाले समय में वही कंपनियां मजबूत स्थिति में रह सकती हैं, जो AI तकनीक को सफल कारोबार में बदलने के साथ अपने खर्च और कमाई के बीच संतुलन बना पाएंगी।

कुल मिलाकर AI की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन इसकी चमक के साथ आर्थिक जोखिम भी सामने आने लगे हैं। अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों से लेकर भारत तक की अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह दौर बेहद अहम साबित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि AI खरबों डॉलर के निवेश को मुनाफे में बदल पाएगा या यह तकनीकी इतिहास का सबसे बड़ा निवेश जोखिम बनकर सामने आएगा।

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