गुरुवार, 5 नवंबर 2026
लोकतंत्र लाइव टीवी लोगो
ब्रेकिंग

अंग्रेजों के जमाने में किसने बिछाई थी भारत में रेलवे की पटरियां? जानिए किन भारतीय मजदूरों के पसीने से तैयार हुआ रेल नेटवर्क

भारत में रेलवे की शुरुआत के पीछे क्या थी अंग्रेजों की असली रणनीति? जानिए किस कंपनी ने चलाई पहली ट्रेन और किन भारतीय मजदूरों ने किया था निर्माण

Deepika

• Sr. Video Editor, Lucknow

2 मिनट नई दिल्ली

शेयर करें:
अंग्रेजों के जमाने में किसने बिछाई थी भारत में रेलवे की पटरियां? जानिए किन भारतीय मजदूरों के पसीने से तैयार हुआ रेल नेटवर्क

 आज भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारत में रेलवे की पटरियां किसने बिछाई थीं? अक्सर रेलवे के इतिहास का जिक्र होने पर अंग्रेज इंजीनियरों और ब्रिटिश कंपनियों के नाम सामने आते हैं, लेकिन इस विशाल रेल नेटवर्क को जमीन पर तैयार करने में लाखों भारतीय मजदूरों की अहम भूमिका थी।

भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को हुई थी। उस दिन पहली यात्री ट्रेन मुंबई के बोरीबंदर से ठाणे के बीच करीब 34 किलोमीटर की दूरी तक चली थी। इस रेल लाइन का निर्माण ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) कंपनी ने कराया था। इसके पीछे ब्रिटिश पूंजी, तकनीक और इंजीनियरिंग व्यवस्था की बड़ी भूमिका थी।

अंग्रेज इंजीनियरों की निगरानी में भारतीय मजदूरों ने किया निर्माण

ब्रिटिश शासन के दौरान रेलवे लाइनों की योजना और तकनीकी डिजाइन तैयार करने का काम मुख्य रूप से ब्रिटिश इंजीनियर करते थे। निर्माण के ठेके ब्रिटिश और भारतीय ठेकेदारों को दिए जाते थे। वहीं पटरियां बिछाने, मिट्टी की खुदाई, पहाड़ काटने, पुल बनाने और सुरंग तैयार करने जैसे कठिन काम भारतीय मजदूर करते थे।

इतिहासकारों के मुताबिक, 1850 से 1900 के बीच भारत में रेलवे निर्माण के लिए लाखों मजदूरों की जरूरत पड़ी। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से मजदूरों को बुलाकर निर्माण कार्य कराया गया। कई मजदूर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम में काम करते थे।

कौन-कौन सी कंपनियों ने बिछाया रेलवे नेटवर्क?

अंग्रेजों के शासनकाल में भारत में रेलवे विस्तार के लिए कई ब्रिटिश कंपनियों ने काम किया। इनमें प्रमुख थीं:
- ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR)
- ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी (EIR)
- मद्रास रेलवे कंपनी
- ग्रेट सदर्न ऑफ इंडिया रेलवे
शुरुआती दौर में इन कंपनियों को ब्रिटिश निवेशकों से पूंजी मिलती थी। बाद में 1869 के आसपास ब्रिटिश सरकार ने सीधे रेलवे निर्माण की जिम्मेदारी भी संभालनी शुरू कर दी।

अंग्रेजों ने भारत में रेलवे क्यों शुरू की थी?

भारत में रेलवे शुरू करने के पीछे अंग्रेजों के कई आर्थिक और राजनीतिक उद्देश्य थे। ब्रिटिश सरकार भारत के कपास और अन्य कच्चे माल को बंदरगाहों तक तेजी से पहुंचाना चाहती थी, ताकि उन्हें ब्रिटेन भेजा जा सके। इसके अलावा अंग्रेजों को सेना और प्रशासनिक व्यवस्था को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए भी रेलवे की जरूरत थी।

इस तरह भारत का रेलवे नेटवर्क केवल परिवहन का साधन नहीं बना, बल्कि ब्रिटिश शासन की आर्थिक और प्रशासनिक रणनीति का भी अहम हिस्सा रहा।

आजादी से पहले तैयार हुआ यह रेल नेटवर्क आगे चलकर स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्थाओं में शामिल हो गया। इसके निर्माण के पीछे ब्रिटिश इंजीनियरों की तकनीक के साथ उन लाखों भारतीय मजदूरों का श्रम भी था, जिनका योगदान इतिहास में अक्सर कम चर्चा में आता है।

शेयर करें:

ये भी पढ़ें

और देखें →