अयोध्या के तारुन ब्लॉक में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा आयोजित की गई। ब्लॉक के 15 केंद्रों पर कक्षा 5 से 12 तक के 825 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा में हिस्सा लिया, जबकि 900 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था।
अयोध्या। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से शनिवार को अयोध्या जिले के तारुन ब्लॉक में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा में कक्षा पांच से 12वीं तक के 825 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉक में कुल 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, इतिहास, परंपराओं, महापुरुषों के आदर्शों और नैतिक मूल्यों से परिचित कराना है। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति समझ विकसित करने के साथ उन्हें अपने जीवन में अच्छे संस्कारों और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया।
15 परीक्षा केंद्रों पर हुआ आयोजन
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के लिए तारुन ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इनमें एसजीएम पब्लिक स्कूल तारुन, जनता इंटर कॉलेज, सुमित्रा इंटर कॉलेज हैदरगंज, बाबा गजेन्द्र इंटर कॉलेज, अनंत इंटर कॉलेज खपराडीह और ग्राम स्वावलंबी इंटर कॉलेज रानियां समेत कुल 15 केंद्र शामिल रहे। इन केंद्रों पर कक्षा पांच से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
परीक्षा के लिए विद्यार्थियों ने पहले से पंजीकरण कराया था। परीक्षा संयोजक सत्यनारायण दुबे के अनुसार, इस आयोजन के लिए 900 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 825 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इस प्रकार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े विषयों पर अपनी जानकारी परखने का अवसर प्राप्त किया।
नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन विद्यार्थियों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से किया जाता है। वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को इतिहास, परंपराओं, संस्कारों और नैतिक मूल्यों की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है।
परीक्षा में भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों की विषय संबंधी जानकारी का आकलन किया जाता है। साथ ही उन्हें देश के इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और समाज के निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों के विचारों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
महापुरुषों के आदर्शों और नैतिक मूल्यों पर जोर
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को महापुरुषों के आदर्शों और उनके जीवन से मिलने वाली सीख से परिचित कराना है। उनके विचारों और कार्यों के माध्यम से बच्चों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सेवा, सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों का महत्व समझाने का प्रयास किया जाता है।
विद्यार्थी जब अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, तो उन्हें देश की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को समझने का अवसर मिलता है। ऐसी परीक्षाएं विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर सामान्य ज्ञान और सांस्कृतिक विषयों के अध्ययन के लिए भी प्रेरित करती हैं। इससे उनमें सीखने की रुचि बढ़ाने और अपने ज्ञान का आकलन करने का अवसर मिलता है।
चरित्र निर्माण और राष्ट्रभावना विकसित करने की पहल
आयोजन का उद्देश्य केवल परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की जानकारी परखना नहीं, बल्कि उनमें अच्छे संस्कार, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभावना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के प्रयास से भी जुड़ा है। विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने, दूसरों के प्रति सम्मान रखने और सकारात्मक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष है।
शिक्षा के साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों की समझ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा इसी दिशा में विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराने का माध्यम है। इसके जरिए बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के महत्व को समझने और उसके सकारात्मक पक्षों को जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया जाएगा सम्मानित
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति प्रोत्साहित करना और भारतीय संस्कृति से संबंधित विषयों में उनकी रुचि बढ़ाना है। सम्मान मिलने से विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों को पहचानने और आगे भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिल सकती है।
तारुन ब्लॉक में आयोजित परीक्षा में 900 से अधिक विद्यार्थियों के पंजीकरण और 825 छात्र-छात्राओं की भागीदारी से आयोजन में विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज हुई। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से आयोजित इस परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया।