बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू (घाघरा) की कटान से करीब 70 मकान और 1,000 बीघा खेत नदी में समा गए हैं। रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के 38 गांव प्रभावित हैं और करीब 1,635 हेक्टेयर खेत डूबे हैं। ग्रामीण कटान रोकने के इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन बाराबंकी के नदी किनारे के गांवों में सरयू (घाघरा) की कटान ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर गांव में करीब 70 मकान और 1,000 बीघा खेती की जमीन नदी में समा चुकी है। गांव का पुराना टेलीफोन केंद्र, पशु चिकित्सालय और एक मंदिर भी कटान की चपेट में आ गए हैं।
बाबा नारायण दास का मंदिर लगभग नदी में समाने की कगार पर है। मंदिर के बरामदे का फर्श टूटकर गिर चुका है। हेतमापुर के अलावा घुटरू, कोठी डीहा, बाबा का पुरवा, सुंदरनगर, परशुरामपुर और फाजीपुर जैसे गांवों में भी कटान का खतरा बना हुआ है।
तीन तहसीलों के 38 गांव प्रभावित
रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील के कुल 38 गांव बाढ़ और कटान से प्रभावित हैं। पूरे इलाके में करीब 1,635 हेक्टेयर खेत पानी में डूबे हैं। दो महीने तक बाढ़ झेलने के बाद अब करीब एक महीने से कटान जारी है। कई परिवार अपने घर नदी में समाते देख दूसरी जगह शरण लेने को मजबूर हैं।
नुकसान की मुख्य बातें
- हेतमापुर: करीब 70 मकान और 1,000 बीघा (लगभग 125 हेक्टेयर) जमीन नदी में
- नष्ट: पुराना टेलीफोन केंद्र, पशु चिकित्सालय, मंदिर का हिस्सा
- प्रभावित गांव: 38 (तीन तहसीलें)
- डूबे खेत: करीब 1,635 हेक्टेयर
प्रशासन का दावा- लगातार मदद
अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह का कहना है कि प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह के मुताबिक नदी का जलस्तर घटा है, तराई क्षेत्र की निगरानी हो रही है और प्रभावितों को लगातार मदद दी जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि बस्ती पूरी तरह उजड़ने से पहले कटान रोकने के लिए बोल्डर और ठोकर जैसे इंतजाम किए जाएं।
अयोध्या में भी सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और रुदौली के मांझा गांवों के लोग चार महीने से पानी से घिरे हैं।
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