CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों और संगठनों का विरोध तेज है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में आज उनके खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। याचिकाओं में SIR और कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस ने सोमवार शाम महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है। वहीं, INDIA ब्लॉक की ओर से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च की तैयारी है। विपक्षी दल SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
इस बीच5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले और तकनीकी बदलाव अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के निलंबन, कथित एकतरफा फैसलों की जांच और SIR से जुड़े कदमों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।
जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी बनी विपक्ष का मुद्दा
SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की 4 अक्टूबर की टिप्पणी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। NALSAR यूनिवर्सिटी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसी प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करना मनमाना हो सकता है। उन्होंने मतदाता का नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई के महत्व पर भी जोर दिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अन्य विपक्षी नेताओं ने इन टिप्पणियों को CEC के खिलाफ अपने आरोपों के समर्थन के तौर पर पेश किया है। हालांकि, जस्टिस भुइयां की ये टिप्पणियां किसी लंबित SIR याचिका में उनके न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं हैं।
दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन
रविवार को दिल्ली और मुंबई में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हुए। दिल्ली में विपक्षी और युवा संगठनों ने CEC के इस्तीफे की मांग की, जबकि मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने SIR के खिलाफ मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच और CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। चुनाव आयोग और बीजेपी ने मतदाता सूची में बदलावों को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।
विपक्ष का कहना है कि SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। वहीं, आज की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को CEC की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।