विशेषज्ञों का कहना है कि यह गर्मी सिर्फ मौसम नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है। यूरोप में बनी यह “हीट डोम” जैसी स्थिति बड़े पैमाने पर गर्म हवाओं को रोककर तापमान को लगातार बढ़ा रही है, जिससे इंसानी जीवन और बुनियादी ढांचा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर भारत पर भी पड़ेगा और क्या यहां भी तापमान और मौसम पैटर्न में बदलाव देखने को मिलेगा।
भारत पर सीधे तौर पर इसका असर मौसम को थोड़ा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वैश्विक जलवायु प्रणाली आपस में जुड़ी हुई है। हालांकि भारत पहले से ही मानसून सिस्टम पर निर्भर है, इसलिए यूरोप की यह गर्मी यहां मौसम को तुरंत नहीं बदलती, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भारत में भी भविष्य में हीटवेव की तीव्रता बढ़ने का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कार्बन उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप दोनों को और अधिक गंभीर गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।








