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Explained: सोने के बढ़ते आयात से अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर? आंकड़ों के जरिए समझिए पूरी कहानी

भारत में सोने का बढ़ता आयात अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए चिंता की बात बनता है, क्योंकि सोना खरीदने के लिए देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा यानी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। जब भारत ज्यादा सोना विदेशों से खरीदता है, तो आयात बिल बढ़ जाता है और देश का व्यापार घाटा…

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V K Singh

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Explained: सोने के बढ़ते आयात से अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है असर? आंकड़ों के जरिए समझिए पूरी कहानी

भारत में सोने का बढ़ता आयात अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए चिंता की बात बनता है, क्योंकि सोना खरीदने के लिए देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा यानी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। जब भारत ज्यादा सोना विदेशों से खरीदता है, तो आयात बिल बढ़ जाता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ने लगता है। आसान भाषा में समझें तो भारत जितना सामान विदेशों को बेचता है, उससे ज्यादा सामान अगर विदेशों से खरीदता है, तो घाटा बढ़ता है। सोना एक बड़ा आयातित आइटम है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने पर विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और रुपये की कीमत पर भी असर दिख सकता है।

आंकड़ों से समझें तो भारत का सोना आयात 2025-26 में करीब 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह लगभग 58 अरब डॉलर, 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में करीब 35 अरब डॉलर था। यानी कुछ सालों में सोने के आयात बिल में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसका सीधा असर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD पर पड़ता है। CAD तब बढ़ता है, जब देश के आयात और विदेशी भुगतान, निर्यात और विदेशी कमाई से ज्यादा हो जाते हैं। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत का चालू खाते का घाटा करीब 30.1 अरब डॉलर, यानी GDP का लगभग 1 प्रतिशत बताया गया।

सोने के ज्यादा आयात का एक नुकसान यह भी है कि यह पैसा उत्पादन बढ़ाने वाली चीजों में नहीं लग पाता। अगर वही पैसा मशीनरी, तकनीक, उद्योग या इंफ्रास्ट्रक्चर में लगे तो रोजगार और विकास को सीधा फायदा मिल सकता है, लेकिन सोना ज्यादातर निवेश या आभूषण के रूप में घरों में पड़ा रहता है। इसलिए सरकार समय-समय पर लोगों को सोने की नई खरीद कम करने, पुराने सोने के इस्तेमाल और गोल्ड एक्सचेंज जैसी योजनाओं की ओर बढ़ने की सलाह देती है। कुल मिलाकर, सोना सांस्कृतिक और निवेश के लिहाज से अहम जरूर है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा आयात देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापार घाटा, रुपये की कमजोरी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के रूप में असर डाल सकता है।

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