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जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल, बोले- सरकार नियुक्त करेगी तो निष्पक्षता कैसे बचेगी?

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में सरकार का प्रभाव रहेगा, तो आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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Pawan Kumar

2 मिनट नई दिल्ली

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जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल, बोले- सरकार नियुक्त करेगी तो निष्पक्षता कैसे बचेगी?
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है।

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मौजूदा सरकार के हाथ में होगी, तो आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

जस्टिस नरीमन ने 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका बढ़ने से आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके नामित व्यक्ति वाली चयन प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट को जल्द फैसला करना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसी व्यवस्था चुनाव आयोग की निष्पक्षता को मजबूत कर सकती है।

SIR और 90 लाख मतदाताओं का मुद्दा

SIR को लेकर भी जस्टिस नरीमन ने चिंता जताई। उन्होंने पश्चिम बंगाल में करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने  का जिक्र करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मताधिकार प्रभावित होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाया। उनके मुताबिक करीब 22 लाख लोगों ने अपील की और जिन अपीलों पर फैसला हुआ, उनमें बड़ी संख्या में फैसले मतदाताओं के पक्ष में आए।

उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार संविधान और लोकतंत्र के केंद्र में है और इसे लेकर गंभीर खतरे की स्थिति नहीं होनी चाहिए। जस्टिस नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर जल्द हस्तक्षेप और सुधार की उम्मीद जताई।

 चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का भी जिक्र

जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दो चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति थी, तो उन्होंने कानून में उपलब्ध अपने अधिकारों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी और स्वतंत्र होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को लेकर संविधान पीठ को जल्द फैसला करना चाहिए।

जस्टिस नरीमन की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और इस मामले से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया और अपने फैसलों का बचाव करते हुए हाल में कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों की घोषणा भी की है।

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