जयंत चौधरी को NDA कोटे से राज्यसभा भेजने की तैयारी, सपा वाली सीट का मुद्दा खत्म करेगी भाजपा
रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी 2022 में सपा के कोटे से राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है। अब भाजपा-एनडीए उन्हें 16 अक्टूबर के राज्यसभा चुनाव में एनडीए कोटे से भेजने की तैयारी में है, ताकि 2027 चुनाव में सपा इसे मुद्दा न बना सके।
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी (फाइल फोटो) — प्रतीकात्मक फोटो: Ministry of Skill Development and Entrepreneurship / Wikimedia Commons (GODL-India)
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम बदलाव की तैयारी है। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी को एनडीए के कोटे से राज्यसभा भेजने की तैयारी चल रही है। जयंत अभी भी राज्यसभा सदस्य हैं, लेकिन यह सीट उन्हें 2022 में समाजवादी पार्टी के कोटे से मिली थी।
जून 2022 में जब सपा और रालोद का गठबंधन था, तब सपा ने अपने कोटे से जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा था, जबकि उस समय रालोद के पास 9 विधायक थे। उनका मौजूदा कार्यकाल 2022 से 2028 तक है। 2024 में रालोद सपा का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गई थी और गठबंधन की बातचीत में एक राज्यसभा सीट का वादा किया गया था।
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी (फाइल फोटो) — प्रतीकात्मक फोटो: Ministry of Skill Development and Entrepreneurship / Wikimedia Commons (GODL-India)
भाजपा की रणनीति क्या है
बताया जा रहा है कि भाजपा नहीं चाहती कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा यह मुद्दा उठाए कि जयंत चौधरी उसके कोटे की सीट पर राज्यसभा में बैठकर एनडीए सरकार में मंत्री हैं। हाल के दिनों में सपा और रालोद नेताओं के बीच बढ़ी तल्खी ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।
रालोद की चिंता
रालोद नेताओं को यह भी चिंता है कि 2028 के बाद अगर जयंत के पास राज्यसभा की सीट नहीं रही, तो उनके मंत्रिमंडल में बने रहने पर सवाल उठ सकता है। ऐसे में अभी एनडीए कोटे से नई सीट मिलना पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
जयंत चौधरी: रालोद अध्यक्ष, केंद्रीय राज्य मंत्री
मौजूदा राज्यसभा सीट: जून 2022, सपा कोटे से, कार्यकाल 2028 तक
राज्यसभा चुनाव: 16 अक्टूबर 2026
अंतिम फैसला: जयंत के विदेश से लौटने के बाद
इस पर अंतिम फैसला जयंत चौधरी के विदेश से लौटने के बाद होगा। बागपत और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद का मजबूत जनाधार है, इसलिए 2027 के चुनाव में इस फैसले का असर दिख सकता है।