कानपुर नगर निगम में ठेकों को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। जांच में पता चला कि जरूरी दस्तावेज न होने और कई कागजात फर्जी होने के बावजूद 11 फर्मों के टेंडर नवीनीकृत कर दिए गए। मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने की। इसके बाद मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त को सभी 11 फर्मों को ब्लैकलिस्ट और डिबार करने का निर्देश दिया है।
जांच में क्या मिला
- कई फर्मों के पिछले तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट नहीं
- दो-तीन साल के बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न और बैलेंस शीट गायब
- श्रम विभाग का पंजीकरण और प्रदूषण अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं
- एक ही प्लांट के फर्जी कागज कई फर्मों के लिए इस्तेमाल
- प्लांट की क्षमता में गड़बड़ी: रिकॉर्ड में 60-80 टन प्रति घंटा, बिल में 40-50 टन प्रति घंटा
- प्रमाणपत्रों की अवधि खत्म होने के बावजूद टेंडर नवीनीकृत
जांच के दायरे में फर्में
जांच के दायरे में आईजे टाइल्स इंडस्ट्रीज, जय श्रीहरि ट्रेडर्स, अजय कुमार बाजपेई, कुमार इंजीनियर्स, एसआरएस कंपनी, पीके एंटरप्राइजेज, मेहर रॉक प्राइवेट लिमिटेड, श्री कनक गतिमान कंस्ट्रक्शन कंपनी, जीआरए इंफ्रा सॉल्यूशंस, स्टार कंस्ट्रक्शन और दीपेश कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स शामिल हैं। इससे पहले पांच फर्में दिलीप कुमार बाजपेई एंटरप्राइजेज, कैला देवी कंस्ट्रक्शन, पार्श्वनाथ बिल्डर्स, तिरुपति एंटरप्राइजेज और अजय एंटरप्राइजेज ब्लैकलिस्ट हो चुकी हैं।

शहर पर असर
नगर निगम के ये ठेके सड़क और निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। अधूरे कागजात वाली फर्मों को काम मिलने से काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं। कानपुर की खराब सड़कों को लेकर पहले से ही लोग परेशान हैं, यहां तक कि खराब सड़कों और उड़ानों की कमी की वजह से शहर एक राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी भी गंवा चुका है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।





