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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों पर NHAI का बड़ा एक्शन, PNC Infratech पर 3 साल का बैन

लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण और सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क क्षतिग्रस्त होने, धंसने और अन्य निर्माण संबंधी…

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V K Singh

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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों पर NHAI का बड़ा एक्शन, PNC Infratech पर 3 साल का बैन

लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण और सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क क्षतिग्रस्त होने, धंसने और अन्य निर्माण संबंधी खामियों की शिकायतों के बाद NHAI ने परियोजना से जुड़ी कंपनी PNC Infratech पर तीन साल के लिए नई परियोजनाओं की बोली में शामिल होने पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई अनुबंध के तहत उपलब्ध अधिकतम अवधि वाली डिबारमेंट कार्रवाई बताई जा रही है।

NHAI की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, PNC Infratech और उसकी कंसैशनायर कंपनी Awadh Expressway Pvt Ltd को तीन वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), NHAI और उनकी संबंधित एजेंसियों की ओर से जारी होने वाली नई परियोजनाओं की बोलियों में हिस्सा लेने से रोका गया है। कंपनी ने अपने नियामकीय खुलासे में बताया कि उसे NHAI का संबंधित पत्र 11 सितंबर 2026 को मिला था।

उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आईं खामियां

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के अलग-अलग हिस्सों में नुकसान और स्लिपेज की शिकायतें सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर समय से पहले क्षति और सड़क के हिस्सों में समस्या देखी गई। इसी के बाद परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर जांच शुरू हुई।

NHAI से जुड़ी कार्रवाई के बीच एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में ताजा क्षति की रिपोर्ट भी सामने आई है। NHAI ने सड़क की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर ऑडिट कराने का आदेश दिया है, ताकि नुकसान के कारणों और निर्माण एवं रखरखाव के मानकों की जांच की जा सके।

इससे पहले एक जांच में प्रभावित हिस्सों की स्थिति को लेकर डिजाइन संबंधी खामियों की बात सामने आने की रिपोर्टें भी प्रकाशित हुई थीं।

3 साल तक नए प्रोजेक्ट की बोली में नहीं ले सकेगी हिस्सा

NHAI की कार्रवाई का सीधा असर PNC Infratech की नई सरकारी सड़क परियोजनाओं में भागीदारी पर पड़ेगा। कंपनी तीन साल तक NHAI, MoRTH और संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों की नई परियोजनाओं के लिए बोली नहीं लगा सकेगी।

हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक इस डिबारमेंट का कंपनी के पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। PNC Infratech ने यह भी कहा है कि वह इस मामले में उपलब्ध कानूनी विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की शुरुआती क्षति का मामला न्यायिक स्तर तक भी पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस संबंध में मामला सामने आया, जिसके बाद केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा गया था।

एक्सप्रेसवे पर कम समय में सड़क के कई हिस्सों में क्षति की शिकायतों ने परियोजना की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए। इसके बाद NHAI की ओर से तकनीकी जांच और कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ा।

कंपनी के शेयरों में 20 फीसदी तक गिरावट

NHAI की तीन साल की डिबारमेंट कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद PNC Infratech के शेयर में भी तेज गिरावट देखने को मिली। 15 सितंबर को कंपनी का शेयर 20 फीसदी तक गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया था। BSE पर शेयर करीब 20 फीसदी गिरकर 140.40 रुपये के आसपास बंद हुआ।

इस गिरावट के बाद कंपनी के शेयर ने 52 हफ्तों के निचले स्तर के आसपास कारोबार किया। बाजार में इस गिरावट को NHAI और MoRTH की नई परियोजनाओं में तीन साल की भागीदारी पर लगी रोक से जोड़कर देखा गया।

आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल एक्सप्रेसवे की मरम्मत, गुणवत्ता जांच और प्रभावित हिस्सों को सुरक्षित बनाने को लेकर है। NHAI की ओर से सुरक्षा और गुणवत्ता ऑडिट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ऑडिट के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क में सामने आई समस्याओं की तकनीकी वजह क्या है और किन हिस्सों में सुधार या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

वहीं, PNC Infratech की ओर से कानूनी विकल्पों पर विचार किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में कंपनी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर आगे की प्रक्रिया और NHAI की जांच रिपोर्ट पर भी नजर रहेगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना है। इसलिए निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवालों के बीच NHAI की यह कार्रवाई परियोजना की निगरानी, सड़क सुरक्षा और भविष्य की हाईवे परियोजनाओं में ठेकेदारों की जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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