तेलंगाना के CEO सी. सुधर्शन रेड्डी ने फॉर्म-7 विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि मुशीराबाद और गोशामहल में मिले अधूरे या गलत तरीके से भरे आवेदन खारिज कर दिए गए हैं।
हैदराबाद। तेलंगाना में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासी विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) सी. सुधर्शन रेड्डी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मुशीराबाद और गोशामहल विधानसभा क्षेत्रों में सामने आए विवादित फॉर्म की जांच की गई और वे अधूरे या निर्धारित तरीके से नहीं भरे गए थे। इसलिए उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
दरअसल, AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि SIR के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं। ओवैसी ने चुनाव आयोग से प्रत्येक फॉर्म की जांच करने और आवेदन जमा करने वालों की पहचान सत्यापित करने की मांग की थी। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी।
गोशामहल में भी सामने आए प्री-प्रिंटेड फॉर्म
मामला तब और गरमा गया जब गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में 15 प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 सामने आने की रिपोर्ट आई। स्थानीय BLO ने कथित तौर पर इन फॉर्म को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इससे पहले मुशीराबाद में भी बड़ी संख्या में प्री-प्रिंटेड फॉर्म जमा किए जाने को लेकर शिकायत सामने आई थी।
तेलंगाना कांग्रेस ने मुशीराबाद मामले में आरोप लगाया था कि एक BJP बूथ लेवल एजेंट ने एक कांग्रेस कार्यकर्ता और उसके परिवार के करीब 30 सदस्यों के नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सबूत सामने रखने की मांग की है।
CEO ने कहा- बिना सत्यापन नहीं हटेगा नाम
CEO सी. सुधर्शन रेड्डी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर फॉर्म-7 बड़ी संख्या में जमा होते हैं तो उनकी उचित जांच और फील्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का नाम सत्यापन के बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।
फॉर्म-7 विवाद के बीच चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। फिलहाल मुशीराबाद और गोशामहल से जुड़े जिन विवादित आवेदनों का जिक्र हुआ है, उनके खारिज होने की बात CEO की ओर से कही गई है।