उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चार दिनों के भीतर हुए दो भीषण सड़क हादसों में कुल 8 लोगों की मौत हो गई। पहले हादसे में सेना के सूबेदार का पार्थिव शरीर लेकर जा रही एंबुलेंस ट्रक से टकरा गई, जिसमें चालक समेत चार लोगों की जान चली गई।
सुल्तानपुर। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुल्तानपुर में महज चार दिनों के भीतर करीब 18 किलोमीटर के दायरे में दो बड़े हादसे हुए, जिनमें आठ लोगों की जान चली गई। मृतकों में छह लोग देवरिया जिले के रहने वाले बताए गए हैं। लगातार हुई इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। बुधवार को जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने यूपीडा के अधिकारियों, क्षेत्राधिकारियों और उपजिलाधिकारियों के साथ आपात बैठक कर सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करने, सड़क सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और पेट्रोलिंग को प्रभावी बनाने सहित कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा से जुड़ी किसी भी कमी को नजरअंदाज न किया जाए और हादसों की रोकथाम के लिए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दुर्घटना संभावित स्थानों पर बढ़ाई जाएगी सुरक्षा
जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उन स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जाए, जहां दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। ऐसे स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि वाहन चालकों को समय रहते खतरे का संकेत मिल सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
डीएम ने कहा कि जहां भी सड़क की डिजाइन, यातायात संकेतक, प्रकाश व्यवस्था, रिफ्लेक्टर या क्रैश बैरियर जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी पाई जाए, उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाए। एक्सप्रेस-वे पर वाहन तेज गति से चलते हैं, ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सड़क की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया।
सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को हटाने के निर्देश
बैठक में सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों और ट्रकों को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई। डीएम ने यूपीडा के अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों या किसी अन्य कारण से सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। ऐसे वाहनों के कारण तेज गति से आने वाले दूसरे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि किसी कारण से वाहन खड़ा करना पड़े तो उससे पहले पर्याप्त दूरी पर चेतावनी संकेत लगाए जाएं। वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होने चाहिए, ताकि कम रोशनी या रात के समय दूसरे चालकों को दूर से ही खड़े वाहन का पता चल सके। इसके साथ ही एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
ओवरस्पीडिंग और गलत लेन में चलने वालों पर होगी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे पर ओवरस्पीडिंग, गलत लेन में वाहन चलाने और लापरवाही से ड्राइविंग करने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाए। यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एसपी ने सीसीटीवी कैमरों और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के जरिए तेज गति से चलने वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई की जाए। इसका उद्देश्य एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों की लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है।
सुबह 4 से 8 बजे तक विशेष पेट्रोलिंग के निर्देश
बैठक में सुबह के समय होने वाले संभावित हादसों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलिंग को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। एसपी ने कहा कि सुबह चार बजे से आठ बजे तक पेट्रोलिंग वाहनों को सक्रिय रखा जाए। इस दौरान सड़क किनारे खड़े बड़े वाहनों और ट्रकों को हटाने के साथ ही एक्सप्रेस-वे पर आने-जाने वाले वाहनों पर विशेष निगरानी की जाए।
रात के समय, भोर और कम दृश्यता की परिस्थितियों में पेट्रोलिंग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, यूपीडा और एंबुलेंस की संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए, जिससे घायलों तक जल्द सहायता पहुंच सके और उन्हें समय पर अस्पताल ले जाया जा सके।
सभी विभागों को मिलकर करना होगा काम
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पुलिस, जिला प्रशासन, यूपीडा, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल रहने से दुर्घटना संभावित स्थानों पर समय रहते सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकेंगे और हादसों की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य भी तेजी से किया जा सकेगा।
चार दिनों के भीतर दो हादसों में आठ लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को हटाने, ओवरस्पीडिंग पर निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। इन निर्देशों का कितना प्रभाव पड़ता है, यह आने वाले दिनों में एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटनाओं की स्थिति से स्पष्ट होगा।