सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के एक मामले में छह लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने संबंधी आपराधिक कार्यवाही रद्द की है। Free Press Journal की आठ अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंध टूटना या विवाह से इनकार करना अपने आप में उकसावे का अपराध स्थापित नहीं करता।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने आरोपों में जानबूझकर उकसाने के आवश्यक आधार नहीं पाए। मामला एक महिला की मृत्यु और उसके साथी सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा था।
यह संबंधित मामले में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों पर निर्णय है। इसे हर रिश्ते से जुड़े विवाद में बिना जांच स्वतः छूट मिलने का नियम न मानें। खबर में मृतका की पहचान या मृत्यु के तरीके का विवरण नहीं दिया गया है।





