यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर से जुड़े कई डिग्री प्रोग्राम के नाम और ढांचे में बदलाव किया है। यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने की बात कही गई है। नए प्रावधानों के तहत मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल…
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर से जुड़े कई डिग्री प्रोग्राम के नाम और ढांचे में बदलाव किया है। यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने की बात कही गई है। नए प्रावधानों के तहत मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) जैसी डिग्री में संबंधित स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जाएगा।
UGC की डिग्री-स्पेसिफिकेशन व्यवस्था UGC Act, 1956 की धारा 22 के तहत डिग्रियों के नाम और मान्यता से संबंधित है।
MPT में 8 स्पेशलाइजेशन
नए ढांचे के अनुसार MPT करने वाले छात्रों की डिग्री में उनके विशेषज्ञता क्षेत्र का उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए प्रमुख रूप से ये क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं—
- मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज
- न्यूरोसाइंसेज
- कार्डियोवैस्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज
- स्पोर्ट्स साइंसेज
- पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज
- ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी साइंसेज
- ऑन्कोलॉजी साइंसेज
- कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन साइंसेज
MPT की न्यूनतम अवधि दो वर्ष रखी गई है और इसमें प्रवेश के लिए संबंधित बैचलर डिग्री की आवश्यकता होगी।
MOT में भी स्पेशलाइजेशन के साथ डिग्री
मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) के लिए भी विशेषज्ञता आधारित डिग्री का प्रावधान किया गया है। इसमें मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटल साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, मेंटल हेल्थ, कार्डियोवैस्कुलर एंड पल्मोनरी साइंसेज, रिहैबिलिटेशन, जेरियाट्रिक्स, हैंड और ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
MOT की न्यूनतम अवधि भी दो वर्ष होगी और प्रवेश के लिए बैचलर डिग्री जरूरी होगी।
पहले से पढ़ रहे छात्रों पर क्या होगा?
नए बदलाव का असर पहले से MPT या MOT में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर नहीं पड़ेगा। यानी 2026-27 से पहले प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की डिग्री पुराने लागू प्रावधानों के अनुसार जारी की जा सकेगी।
कई नए हेल्थकेयर प्रोग्राम भी सूची में शामिल
बदलाव सिर्फ MPT और MOT तक सीमित नहीं हैं। एलाइड और हेल्थकेयर एजुकेशन से जुड़े कई नए और संशोधित UG-PG डिग्री प्रोग्राम को भी डिग्री सूची में शामिल किया गया है।
इनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, हिस्टोलॉजी और साइकोपैथोलॉजी जैसे क्षेत्रों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट, एडवांस्ड केयर पैरामेडिक्स और एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी से जुड़े डिग्री प्रोग्राम भी शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर National Commission for Allied and Healthcare Professions (NCAHP) एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन के शिक्षा एवं पेशेवर मानकों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार NCAHP का गठन 2024 में NCAHP Act, 2021 के तहत किया गया था।
डिग्री के नाम और योग्यता में एकरूपता पर जोर
इस बदलाव का उद्देश्य एलाइड और हेल्थकेयर से जुड़े डिग्री प्रोग्राम के नाम, अवधि और प्रवेश योग्यता में एकरूपता लाना बताया गया है। इससे अलग-अलग संस्थानों में चल रहे समान पाठ्यक्रमों की डिग्री संरचना को अधिक स्पष्ट और मानकीकृत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।