न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर पर OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की मंत्री-स्तरीय बैठक में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने भारत के खिलाफ कई आरोप लगाए। 23 सितंबर 2026 को हुई बैठक में डार ने दावा किया कि 5 अगस्त 2019 के बाद भारत की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान को बदलना है। OIC की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बैठक न्यूयॉर्क में UNGA के इतर हुई, जिसमें पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब, अजरबैजान और नाइजर समेत संपर्क समूह के सदस्य शामिल हुए। OIC ने अपने बयान में कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन की बात दोहराई। डार ने अपने संबोधन में नए डोमिसाइल नियमों, चुनावी क्षेत्रों में बदलाव और मतदाता सूचियों में गैर-कश्मीरियों के नाम शामिल किए जाने को लेकर भी भारत पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन कदमों से क्षेत्र की पहचान और राजनीतिक ढांचे में बदलाव हो रहा है। पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, मीडिया की स्वतंत्रता पर कथित प्रतिबंध और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए। इन दावों को पाकिस्तान सरकार के रुख के रूप में देखा जाना चाहिए; भारत पहले भी कश्मीर को लेकर पाकिस्तान और OIC के आरोपों को खारिज करता रहा है। भारत के आधिकारिक रुख के मुताबिक जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा वह पाकिस्तान पर इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाता है। डार ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का भी जिक्र किया और आतंकवाद से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान के कदमों को आत्मरक्षा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। सिंधु जल संधि को लेकर भी डार ने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसे एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने OIC सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर एकजुट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने 5 अगस्त 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और कथित जनसांख्यिकीय बदलावों को रोकने की मांग करने का आग्रह किया। पाकिस्तान ने इसके साथ OIC विशेष दूत, UN विशेष प्रक्रियाओं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को जम्मू-कश्मीर तक पहुंच देने की मांग भी रखी।