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इंडोनेशिया और मोनाको के झंडे एक जैसे क्यों? जानिए दोनों देशों के ध्वज का इतिहास और विवाद की कहानी

प्रधानमंत्री Narendra Modi की इंडोनेशिया यात्रा के बीच एक बार फिर Indonesia और Monaco के झंडों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पहली नजर में दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं। दोनों में ऊपर लाल और नीचे सफेद रंग की दो क्षैतिज पट्टियां होती…

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V K Singh

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इंडोनेशिया और मोनाको के झंडे एक जैसे क्यों? जानिए दोनों देशों के ध्वज का इतिहास और विवाद की कहानी

 प्रधानमंत्री Narendra Modi की इंडोनेशिया यात्रा के बीच एक बार फिर Indonesia और Monaco के झंडों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पहली नजर में दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं। दोनों में ऊपर लाल और नीचे सफेद रंग की दो क्षैतिज पट्टियां होती हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर दोनों देशों के झंडे इतने समान क्यों हैं और इसे लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ।

इंडोनेशिया का राष्ट्रीय ध्वज “सांग साका मेराह पुतीह” (Sang Saka Merah Putih) कहलाता है। इसकी जड़ें 13वीं–15वीं शताब्दी के Majapahit Empire तक मानी जाती हैं, जहां लाल और सफेद रंग का विशेष महत्व था। इंडोनेशिया ने 17 अगस्त 1945 को स्वतंत्रता की घोषणा के साथ इसी ध्वज को अपना राष्ट्रीय झंडा घोषित किया।

दूसरी ओर, मोनाको का लाल-सफेद ध्वज यूरोप के शाही House of Grimaldi परिवार के पारंपरिक रंगों से जुड़ा है। इसे वर्ष 1881 में आधिकारिक रूप से अपनाया गया था। यानी मोनाको ने अपने वर्तमान ध्वज को इंडोनेशिया की स्वतंत्रता से कई दशक पहले ही अपना लिया था।

हालांकि, जब इंडोनेशिया ने 1945 में यही रंग-संयोजन वाला झंडा अपनाया, तब मोनाको ने इस समानता पर आपत्ति जताई थी। लेकिन इंडोनेशिया ने स्पष्ट किया कि उसके ध्वज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत सदियों पुरानी है और यह किसी अन्य देश के झंडे की नकल नहीं है। दोनों देशों के झंडों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अलग-अलग होने के कारण अंततः दोनों ने अपने-अपने ध्वज बरकरार रखे।

हालांकि दोनों झंडे देखने में लगभग समान लगते हैं, लेकिन उनमें एक महत्वपूर्ण अंतर है। इंडोनेशिया के झंडे का अनुपात 2:3 है, जबकि मोनाको के झंडे का अनुपात 4:5 है। यही तकनीकी अंतर दोनों ध्वजों को आधिकारिक रूप से अलग पहचान देता है।

दुनिया में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां अलग-अलग देशों के झंडों में रंग या डिज़ाइन काफी मिलते-जुलते हैं, लेकिन उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक महत्व और आधिकारिक मानक अलग होते हैं। इंडोनेशिया और मोनाको का मामला भी इसी का एक प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहां समान दिखने वाले झंडों के पीछे दो अलग-अलग इतिहास और परंपराएं जुड़ी हुई हैं।

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