नई दिल्ली। भीषण गर्मी के इस दौर में एयर कंडीशनर यानी AC लोगों की जरूरत बनता जा रहा है। घर, दफ्तर, मॉल और गाड़ियों तक में AC आम हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस तकनीक पर आज करोड़ों लोग गर्मी से राहत पा रहे हैं, उसका आविष्कार इंसानों को ठंडक पहुंचाने के लिए नहीं किया गया था? दरअसल, एयर कंडीशनर का जन्म एक प्रिंटिंग प्रेस की समस्या को हल करने के लिए हुआ था।
यह कहानी साल 1902 की है, जब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के ब्रुकलिन इलाके में स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस में बड़ी परेशानी सामने आई। गर्मियों के मौसम में हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी बहुत अधिक हो जाती थी। इसकी वजह से कागज सिकुड़ने और फैलने लगते थे, जिससे रंगीन छपाई का काम प्रभावित होता था। अलग-अलग रंगों की प्रिंटिंग सही तरीके से मेल नहीं खा पा रही थी और उत्पादन में दिक्कतें आने लगी थीं।
इसी समस्या को हल करने के लिए युवा इंजीनियर Willis Carrier को जिम्मेदारी सौंपी गई। विलिस कैरियर ने एक ऐसी मशीन विकसित की जो हवा के तापमान के साथ-साथ उसमें मौजूद नमी को भी नियंत्रित कर सके। उन्होंने दुनिया का पहला आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम तैयार किया, जिसका मुख्य उद्देश्य वातावरण में नमी को नियंत्रित करना था।








