ईरान के साथ बढ़े सैन्य तनाव के बाद अमेरिका ने अपने कई मध्य-पूर्वी सहयोगी देशों को बड़े पैमाने पर हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी है। हालिया अनुमोदनों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और जॉर्डन प्रमुख हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने UAE के लिए मिसाइलें, ड्रोन, रडार सिस्टम और F-16 लड़ाकू विमानों से जुड़े हथियारों सहित लगभग 8.4 अरब डॉलर के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। वहीं कुवैत के लिए करीब 8 अरब डॉलर के एयर और मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम तथा जॉर्डन के लिए विमान और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति को भी स्वीकृति दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन रक्षा सौदों के पीछे अमेरिका का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना, ईरान से संभावित खतरों का मुकाबला करना और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन बनाए रखना है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष तथा ऊर्जा अवसंरचना और समुद्री मार्गों पर खतरे के बीच वाशिंगटन अपने साझेदार देशों की वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि हथियारों की बिक्री केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके जरिए अमेरिका क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने, सहयोगी देशों के साथ रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और वैश्विक रक्षा उद्योग में अपनी आर्थिक एवं भू-राजनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करना चाहता है। दूसरी ओर, आलोचकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर हथियारों की आपूर्ति से क्षेत्रीय तनाव और हथियारों की होड़ बढ़ने का खतरा भी बना रह सकता है।








