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बिहार में जमीन की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला! अब 'मौजा' के आधार पर तय होगा रेट, जानिए क्यों लिया गया फैसला

बिहार सरकार ने जमीन के मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब जमीन का सरकारी रेट (सर्किल रेट) पूरे इलाके के बजाय मौजा (राजस्व गांव) के आधार पर तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की वास्तविक बाजार कीमत के अनुरूप जमीन का…

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V K Singh

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बिहार में जमीन की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला! अब 'मौजा' के आधार पर तय होगा रेट, जानिए क्यों लिया गया फैसला

बिहार सरकार ने जमीन के मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब जमीन का सरकारी रेट (सर्किल रेट) पूरे इलाके के बजाय मौजा (राजस्व गांव) के आधार पर तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की वास्तविक बाजार कीमत के अनुरूप जमीन का मूल्यांकन करना और रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

अब तक कई जगहों पर एक ही इलाके के लिए समान सरकारी दर लागू होने से बाजार भाव और सरकारी मूल्य में बड़ा अंतर देखने को मिलता था। इससे राजस्व नुकसान, विवाद और गलत मूल्यांकन जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नई व्यवस्था में हर मौजा की लोकेशन, विकास, सड़क संपर्क और बाजार मूल्य जैसे कारकों को ध्यान में रखकर अलग-अलग दरें तय की जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी, सरकार को स्टांप शुल्क से मिलने वाला राजस्व बेहतर होगा और खरीदारों व विक्रेताओं को अधिक वास्तविक मूल्यांकन का लाभ मिलेगा। हालांकि, नई दरें लागू होने के बाद कुछ क्षेत्रों में जमीन की सरकारी कीमत बढ़ सकती है, जबकि कुछ जगहों पर इसमें कमी भी देखने को मिल सकती है।

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