बिहार में राज्य का पहला महिला विश्वविद्यालय बनने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पटना में ‘मां सीता महिला विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य खर्चों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई है। कैबिनेट बैठक में इसके अलावा पशुपालकों, डेयरी क्षेत्र, उच्च शिक्षा और उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के तहत पशुपालकों को बैंक ऋण के ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसका मतलब है कि लाभुकों को केवल मूलधन चुकाना होगा। योजना के तहत तीन उन्नत नस्ल की गाय या दो भैंस के जरिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी गई है। वहीं कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास के लिए आठ परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके तहत 500 नई दुग्ध सहकारी समितियों के साथ डेयरी, मिल्क चिलिंग सेंटर और BMCU जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए 126.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। कैबिनेट ने बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। दिनकर की जयंती के अवसर पर इस विश्वविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति मिली। विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन आदि के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नवादा के वारिसलीगंज में नए चीनी मिल की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित परियोजना में 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होने की बात कही गई है। इससे नवादा के साथ-साथ नालंदा, शेखपुरा और जमुई के किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट के इन फैसलों में उच्च शिक्षा के विस्तार, महिला शिक्षा, डेयरी विकास, पशुपालन और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।