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वंदे मातरम् पर कोर्ट में कितनी बार हुई लड़ाई? धर्म से अधिकार तक जानें पूरा विवाद

‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद नया नहीं है। आजादी के दौर से लेकर अब तक इसके धार्मिक भाव, अनिवार्य गायन और नागरिक अधिकारों को लेकर अलग-अलग मौकों पर अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया है। कई मामलों में सवाल उठा कि क्या किसी व्यक्ति को यह गीत गाने के लिए मजबूर किया जा…

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V K Singh

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वंदे मातरम् पर कोर्ट में कितनी बार हुई लड़ाई? धर्म से अधिकार तक जानें पूरा विवाद

‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद नया नहीं है। आजादी के दौर से लेकर अब तक इसके धार्मिक भाव, अनिवार्य गायन और नागरिक अधिकारों को लेकर अलग-अलग मौकों पर अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया है। कई मामलों में सवाल उठा कि क्या किसी व्यक्ति को यह गीत गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस एडवाइजरी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरों के गायन की बात कही गई थी। कोर्ट ने एडवाइजरी को रद्द करने से इनकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता और इसका पालन न करने पर कोई दंडात्मक परिणाम नहीं है।

इसके बाद अप्रैल 2026 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे से जुड़ी एक PIL खारिज कर दी। वहीं, मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका पहुंची। यानी समय के साथ विवाद का केंद्र धर्म से लेकर संवैधानिक अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक फैलता गया है।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है—क्या ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करना और इसे गाना दो अलग-अलग संवैधानिक सवाल हैं? और अदालतों ने अब तक इस पर क्या-क्या कहा है? यही पूरी कानूनी लड़ाई इस मुद्दे को लगातार चर्चा में बनाए हुए है।

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