क्या सिर्फ आपके स्मार्टफोन का ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) भी यात्रा में परेशानी की वजह बन सकता है? हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक यात्री को एयरपोर्ट पर केवल इसलिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि उसके फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम आवश्यक डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया के अनुकूल नहीं था। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और अब डिजिटल ट्रैवल सिस्टम को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्री के पास मौजूद स्मार्टफोन का ऑपरेटिंग सिस्टम काफी पुराना था, जिसकी वजह से एयरलाइन और एयरपोर्ट द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल वेरिफिकेशन ऐप ने सही तरीके से काम नहीं किया। बोर्डिंग पास, पहचान सत्यापन और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं में बार-बार तकनीकी समस्या आने के कारण यात्री को लंबे समय तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। बाद में मैनुअल सत्यापन के जरिए उसकी यात्रा पूरी कराई गई।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आज अधिकांश एयरलाइंस और एयरपोर्ट डिजिटल टिकट, ई-केवाईसी, क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप आधारित सेवाओं पर निर्भर हैं। यदि फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत पुराना हो, सुरक्षा अपडेट बंद हो चुके हों या जरूरी ऐप का नवीनतम संस्करण उस डिवाइस पर काम न करता हो, तो ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।







