नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर अब स्कूल स्तर पर कई बदलाव किए जा रहे हैं। खासकर 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए भाषा चयन को अधिक लचीला बनाया गया है, ताकि छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी सीख सकें। इसका उद्देश्य बच्चों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।
नए नियमों के अनुसार अब छात्रों पर किसी एक विशेष भाषा को थोपने की बजाय विकल्प दिया जाएगा। राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर यह तय कर सकती हैं कि तीसरी भाषा कौन सी होगी, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह भारतीय भाषाओं में से ही हो। कई जगहों पर संस्कृत, तमिल, मराठी, बंगाली या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को विकल्प के रूप में शामिल किया जा रहा है।
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र अपनी रुचि और भविष्य की जरूरत के अनुसार भाषा चुन सकेंगे। इससे न केवल उनकी संवाद क्षमता बढ़ेगी बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में भी लाभ मिलेगा। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह बदलाव बच्चों को बहुभाषी और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








