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Gender Affirming Surgery: क्या है जेंडर अफर्मिंग सर्जरी? जानें प्रक्रिया, प्रकार, जोखिम और कितना आता है खर्च

जेंडर पहचान के अनुरूप शारीरिक बदलाव में मदद करती है यह सर्जरी, हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं ऑपरेशन; भारत में प्रक्रिया के अनुसार लाखों रुपये तक हो सकता है खर्च

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Deepika

8 मिनट नई दिल्ली

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Gender Affirming Surgery: क्या है जेंडर अफर्मिंग सर्जरी? जानें प्रक्रिया, प्रकार, जोखिम और कितना आता है खर्च
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नई दिल्ली। जेंडर अफर्मिंग सर्जरी (Gender Affirming Surgery) इन दिनों स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों में चर्चा का हिस्सा है। यह ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपने शारीरिक स्वरूप को अपनी जेंडर पहचान के अनुरूप बनाने के लिए कुछ बदलाव करवा सकता है। ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों में से कुछ लोग अपनी जरूरत, इच्छा और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर इस तरह की सर्जरी का विकल्प चुनते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति सर्जरी नहीं करवाना चाहता और न ही जेंडर पहचान के अनुरूप जीवन जीने के लिए ऑपरेशन कराना अनिवार्य है।

भारत में इस सर्जरी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। आखिर जेंडर अफर्मिंग सर्जरी क्या होती है? इसमें शरीर के किन हिस्सों में बदलाव किया जाता है? ऑपरेशन से पहले किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है? इसमें कितना खर्च आता है और क्या इसके बाद सामान्य जीवन जिया जा सकता है? आइए, इन सभी सवालों को आसान भाषा में समझते हैं।

क्या होती है जेंडर अफर्मिंग सर्जरी?

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का समूह है, जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की शारीरिक विशेषताओं को उसकी जेंडर पहचान के अनुरूप बनाने में मदद करना होता है। इसे पहले कई जगह सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी या जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी भी कहा जाता था।

इसमें व्यक्ति की जरूरत के अनुसार छाती, स्तन, चेहरे, आवाज से संबंधित संरचनाओं या जननांगों में बदलाव करने वाली अलग-अलग प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए सभी के लिए एक जैसी सर्जरी या एक जैसा उपचार निर्धारित नहीं किया जाता।

उदाहरण के तौर पर, कोई ट्रांस पुरुष छाती के आकार में बदलाव करवाना चाह सकता है, जबकि कोई ट्रांस महिला स्तन वृद्धि या जननांग पुनर्निर्माण की प्रक्रिया चुन सकती है। कुछ लोग केवल हार्मोन थेरेपी या अन्य गैर-सर्जिकल विकल्पों से ही संतुष्ट होते हैं। यह पूरी तरह व्यक्ति की जरूरतों, जानकारी और स्वैच्छिक निर्णय पर निर्भर करता है। <Cite refs={["turn701224search4","turn701224search2"]}/>

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी कितने प्रकार की होती है?

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी के कई प्रकार हैं। इनमें से कौन-सी प्रक्रिया उपयुक्त होगी, यह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, लक्ष्य, चिकित्सकीय मूल्यांकन और विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर करता है।

1. टॉप सर्जरी (Top Surgery)

इस श्रेणी में छाती या स्तनों के आकार में बदलाव करने वाली सर्जरी शामिल होती है। ट्रांस पुरुषों के लिए छाती के ऊतकों को हटाकर छाती का आकार अधिक मर्दाना बनाने की प्रक्रिया की जा सकती है। ट्रांस महिलाओं के लिए स्तन वृद्धि की सर्जरी एक विकल्प हो सकती है।

2. बॉटम सर्जरी (Bottom Surgery)

इसमें जननांगों से संबंधित पुनर्निर्माण या अन्य शल्य प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, वैजिनोप्लास्टी के जरिए योनि का निर्माण किया जा सकता है। कुछ ट्रांस पुरुषों के लिए मेटोइडियोप्लास्टी या फैलोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। ये जटिल ऑपरेशन हो सकते हैं और कुछ मामलों में कई चरणों में किए जाते हैं।

3. चेहरे से संबंधित सर्जरी

कुछ लोग चेहरे की बनावट को अपनी जेंडर पहचान के अनुरूप बनाने के लिए फेशियल फेमिनाइजेशन या फेशियल मैस्कुलिनाइजेशन सर्जरी का विकल्प चुनते हैं। इनमें चेहरे की हड्डियों, ठुड्डी, जबड़े या अन्य संरचनाओं में बदलाव शामिल हो सकते हैं।

4. आवाज और अन्य शारीरिक बदलाव

कुछ मामलों में आवाज से संबंधित सर्जरी, एडम्स एप्पल के आकार में बदलाव या शरीर की बनावट से जुड़ी प्रक्रियाएं भी की जा सकती हैं। हालांकि, आवाज में बदलाव के लिए स्पीच और वॉयस थेरेपी जैसे गैर-सर्जिकल विकल्प भी उपलब्ध हैं।

इन सभी प्रक्रियाओं की जरूरत हर व्यक्ति को नहीं होती। सर्जरी का चयन व्यक्ति की प्राथमिकताओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाता है। <Cite refs={["turn701224search4","turn701224search1"]}/>

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी की प्रक्रिया कैसे होती है?

इस सर्जरी की प्रक्रिया केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं होती। इसमें प्रारंभिक परामर्श, स्वास्थ्य की जांच, सर्जरी की योजना और ऑपरेशन के बाद देखभाल जैसे कई चरण शामिल होते हैं।

पहला चरण: विशेषज्ञ से परामर्श

सबसे पहले संबंधित व्यक्ति प्लास्टिक सर्जन, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और जरूरत के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श कर सकता है। इस दौरान व्यक्ति की जरूरतों, स्वास्थ्य संबंधी इतिहास और इच्छित बदलावों पर चर्चा की जाती है।

दूसरा चरण: चिकित्सकीय मूल्यांकन

सर्जरी से पहले व्यक्ति की सामान्य सेहत, पहले से मौजूद बीमारियों, दवाओं और एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन किया जाता है। आवश्यकतानुसार खून की जांच और अन्य परीक्षण कराए जा सकते हैं।

तीसरा चरण: सूचित सहमति और सर्जरी की योजना

डॉक्टर मरीज को प्रस्तावित प्रक्रिया, संभावित लाभ, जोखिम, सीमाओं, प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव और रिकवरी के बारे में जानकारी देते हैं। इसके बाद व्यक्ति को पूरी जानकारी के आधार पर स्वेच्छा से निर्णय लेना होता है।

चौथा चरण: ऑपरेशन

सर्जरी का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि किस प्रकार का बदलाव किया जाना है। कुछ प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत छोटी होती हैं, जबकि जननांग पुनर्निर्माण जैसी सर्जरी अधिक जटिल हो सकती हैं और इनमें लंबे समय तक अस्पताल में रहने या कई चरणों में उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

पांचवां चरण: रिकवरी और फॉलो-अप

ऑपरेशन के बाद घाव की देखभाल, संक्रमण से बचाव, दर्द का प्रबंधन और डॉक्टर की नियमित जांच जरूरी होती है। कुछ प्रक्रियाओं के बाद कई सप्ताह या उससे अधिक समय तक रिकवरी की जरूरत हो सकती है। जटिल सर्जरी में देखभाल और रिकवरी की अवधि अधिक लंबी हो सकती है। <Cite refs={["turn701224search4","turn701224search2"]}/>

भारत में जेंडर अफर्मिंग सर्जरी का कितना खर्च आता है?

इस सर्जरी का खर्च एक समान नहीं होता। अस्पताल, शहर, सर्जन के अनुभव, ऑपरेशन की जटिलता, अस्पताल में रहने की अवधि और बाद की देखभाल के आधार पर कुल लागत बदल सकती है।

भारत में निजी अस्पतालों की प्रकाशित कीमतों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर कुछ प्रक्रियाओं के अनुमानित खर्च इस प्रकार हैं:

सर्जरी का प्रकार

अनुमानित खर्च

छाती का आकार बदलने वाली टॉप सर्जरी

₹1.2–5 लाख

स्तन वृद्धि की सर्जरी

₹1.5–4 लाख

वैजिनोप्लास्टी

₹2–8 लाख

मेटोइडियोप्लास्टी

₹4.5–8 लाख

फैलोप्लास्टी

₹5–15 लाख या अधिक

चेहरे की फेमिनाइजेशन सर्जरी

₹3–10 लाख या अधिक

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ये आंकड़े केवल सांकेतिक अनुमान हैं, निश्चित अस्पताल दरें नहीं। अलग-अलग अस्पतालों में लागत काफी अलग हो सकती है। कुछ सर्जरी में अतिरिक्त प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ने पर कुल खर्च और बढ़ सकता है।

इसके अलावा, सर्जरी से पहले की जांच, डॉक्टरों की फीस, हार्मोन थेरेपी, दवाइयां, अस्पताल में रहने, यात्रा और ऑपरेशन के बाद की देखभाल का खर्च भी बजट में शामिल करना चाहिए। किसी अस्पताल से लिखित लागत अनुमान लेना उपयोगी रहता है।

क्या सरकारी अस्पताल में मुफ्त या कम खर्च पर सर्जरी हो सकती है?

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के SMILE कार्यक्रम के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समग्र चिकित्सा सहायता और आयुष्मान भारत TG Plus स्वास्थ्य बीमा पैकेज का प्रावधान बताया गया है। मंत्रालय के पोर्टल पर पात्र लाभार्थियों के लिए सालाना ₹5 लाख तक के स्वास्थ्य बीमा कवर और जेंडर अफर्मिंग सर्जरी सहित संक्रमण से संबंधित चिकित्सा सेवाओं का उल्लेख है। हालांकि, वास्तविक लाभ पात्रता, लागू दिशा-निर्देशों, अस्पताल के पैनल में शामिल होने और संबंधित सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। <Cite refs={["turn701224search5","turn701224search19"]}/>

इसलिए इच्छुक व्यक्ति को संबंधित सरकारी पोर्टल, योजना के हेल्पडेस्क या सूचीबद्ध अस्पताल से यह पुष्टि करनी चाहिए कि चुनी गई सर्जरी वास्तव में कवर होती है या नहीं। केवल योजना का उल्लेख होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर अस्पताल में हर प्रक्रिया मुफ्त उपलब्ध है।

सर्जरी के क्या जोखिम हो सकते हैं?

किसी भी बड़ी सर्जरी की तरह जेंडर अफर्मिंग सर्जरी में भी कुछ जोखिम हो सकते हैं। इनमें संक्रमण, रक्तस्राव, घाव भरने में परेशानी, निशान पड़ना, एनेस्थीसिया से संबंधित जटिलताएं और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत शामिल हो सकती है।

जननांग पुनर्निर्माण जैसी जटिल प्रक्रियाओं में परिणाम सर्जरी की तकनीक और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में मूत्र संबंधी समस्याएं, संवेदना में बदलाव या अतिरिक्त सुधारात्मक सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है।

सर्जरी से पहले डॉक्टर से संभावित जटिलताओं, अपेक्षित परिणाम, प्रजनन क्षमता पर प्रभाव और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल के बारे में स्पष्ट जानकारी लेना जरूरी है। किसी भी प्रक्रिया के परिणाम की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं दी जा सकती।

क्या जेंडर अफर्मिंग सर्जरी करवाना अनिवार्य है?

नहीं। जेंडर अफर्मिंग सर्जरी हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होती। जेंडर पहचान व्यक्तिगत होती है और हर व्यक्ति अपने शरीर तथा स्वास्थ्य से जुड़ा निर्णय अलग तरीके से ले सकता है।

कुछ लोग हार्मोन थेरेपी चुनते हैं, कुछ सर्जरी करवाते हैं और कुछ किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय बदलाव नहीं चाहते। किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान को केवल उसकी शारीरिक बनावट या सर्जरी के आधार पर निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी चिकित्सकीय प्रक्रिया दबाव, भेदभाव या जबरदस्ती के बजाय व्यक्ति की स्वैच्छिक सहमति, पर्याप्त जानकारी और उचित चिकित्सकीय देखभाल के आधार पर होनी चाहिए।

निष्कर्ष

जेंडर अफर्मिंग सर्जरी उन लोगों के लिए एक चिकित्सकीय विकल्प है, जो अपनी शारीरिक विशेषताओं को अपनी जेंडर पहचान के अनुरूप बनाना चाहते हैं। इसमें छाती, स्तन, चेहरे और जननांगों से संबंधित अलग-अलग प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। भारत में इनका खर्च प्रक्रिया के अनुसार लाखों रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि कुछ पात्र व्यक्तियों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत सहायता मिल सकती है।

सर्जरी का निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञों से परामर्श, संभावित जोखिमों की जानकारी, खर्च का आकलन और ऑपरेशन के बाद की देखभाल की योजना बनाना जरूरी है। सही जानकारी और व्यक्ति की स्वैच्छिक सहमति के साथ ही इस तरह के चिकित्सकीय निर्णय लिए जाने चाहिए।

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